बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तमकि ताकि तकि सिवधनु धरहीं। उठइ न कोटि भाँति बलु करहीं।।
मूल पाठ
तमकि ताकि तकि सिवधनु धरहीं। उठइ न कोटि भाँति बलु करहीं।।
जिन्ह के कछु बिचारु मन माहीं। चाप समीप महीप न जाहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.25 · पुस्तक पृ. 243, 244
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे तमककर (बड़े तावसे) शिवजीके धनुषकी ओर देखते हैं और फिर निगाह जमाकर उसे पकड़ते हैं, करोड़ों भाँतिसे जोर लगाते हैं, पर वह उठता ही नहीं। जिन राजाओंके मनमें कुछ विवेक है, वे धनुषके पास ही नहीं जाते॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 244 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तमकि ताकि तकि सिवधनु धरहीं। उठइ न कोटि भाँति बलु करहीं।।
English explanation
Bracing themselves spiritedly, they inspect and assess Shiva’s bow and grasp it; they exert their strength in countless ways, but it does not rise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तमकि | जोश में तनकर | bracing themselves spiritedly |
| ताकि | ध्यान से देखकर | looking intently |
| तकि | परखकर | assessing it |
| सिवधनु | शिव का धनुष | Shiva’s bow |
| धरहीं | पकड़ते हैं | grasp |
| उठइ | उठता है | rises |
| न | नहीं | not |
| कोटि | करोड़ों, असंख्य | countless |
| भाँति | तरीकों से | in ways |
| बलु | बल | strength |
| करहीं | लगाते हैं | exert |
2 जिन्ह के कछु बिचारु मन माहीं। चाप समीप महीप न जाहीं।।
English explanation
Those kings who have some discernment do not go near the bow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन्ह | जिनके | those whose |
| के | के | possessive linker |
| कछु | कुछ | some |
| बिचारु | विवेक, समझ | discernment |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | within |
| चाप | धनुष के | of the bow |
| समीप | निकट | near |
| महीप | राजा | kings |
| न | नहीं | not |
| जाहीं | जाते हैं | go |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 244
- सहायक विषय
- बन्दीजनोंद्वारा जनकप्रतिज्ञाकी घोषणा
- मुद्रित पृष्ठ
- 243, 244
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।