बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सैल सकल जहँ लगि जग माहीं। लघु बिसाल नहिं बरनि सिराहीं।।
मूल पाठ
सैल सकल जहँ लगि जग माहीं। लघु बिसाल नहिं बरनि सिराहीं।।
बन सागर सब नदीं तलावा। हिमगिरि सब कहुँ नेवत पठावा।।
स्रोत अभिलेख 1.94 · पुस्तक पृ. 108, 108
भावार्थ
मूल पाठ के बादजगत्में जितने छोटे-बड़े पर्वत थे, जिनका वर्णन करके पार नहीं मिलता तथा जितने वन, समुद्र, नदियाँ और तालाब थे, हिमाचलने सबको नेवता भेजा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 108 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सैल सकल जहँ लगि जग माहीं। लघु बिसाल नहिं बरनि सिराहीं।।
English explanation
All the mountains throughout the world, small and great, are too numerous to finish describing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सैल | पर्वत | mountains |
| सकल | सभी | all |
| जहँ | जहाँ | wherever |
| लगि | तक | as far as |
| जग | जगत | the world |
| माहीं | में | in |
| लघु | छोटे | small |
| बिसाल | बड़े | great |
| नहिं | नहीं | not |
| बरनि | वर्णन करके | by describing |
| सिराहीं | समाप्त किए जा सकते | can be exhausted |
2 बन सागर सब नदीं तलावा। हिमगिरि सब कहुँ नेवत पठावा।।
English explanation
Himagiri sent invitations to them all: forests, oceans, all the rivers, and lakes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बन | वन | forests |
| सागर | समुद्र | oceans |
| सब | सभी | all |
| नदीं | नदियाँ | rivers |
| तलावा | तालाब | lakes and ponds |
| हिमगिरि | पार्वती के पिता हिमालय ने | Himalaya, Parvati’s father |
| सब | सब | everyone |
| कहुँ | को | to |
| नेवत | निमंत्रण | invitations |
| पठावा | भेजा | sent |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.94
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 108
- सहायक विषय
- शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 108, 108
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।