बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जस दूलहु तसि बनी बराता। कौतुक बिबिध होहिं मग जाता।।
मूल पाठ
जस दूलहु तसि बनी बराता। कौतुक बिबिध होहिं मग जाता।।
इहाँ हिमाचल रचेउ बिताना। अति बिचित्र नहिं जाइ बखाना।।
स्रोत अभिलेख 1.94 · पुस्तक पृ. 108, 108
भावार्थ
मूल पाठ के बादजैसा दूल्हा है, अब वैसी ही बरात बन गयी है। मार्गमें चलते हुए भाँति-भाँतिके कौतुक (तमाशे) होते जाते हैं। इधर हिमाचलने ऐसा विचित्र मण्डप बनाया कि जिसका वर्णन नहीं हो सकता॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 108 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जस दूलहु तसि बनी बराता। कौतुक बिबिध होहिं मग जाता।।
English explanation
AI draft: As was the bridegroom, so was his wedding procession. Various amusing spectacles occurred as they traveled along the road.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जस | जैसा | as was |
| दूलहु | दूल्हा, यहाँ शिव | the bridegroom, here Shiva |
| तसि | वैसी ही | just so |
| बनी | बनी थी | was formed |
| बराता | बरात | wedding procession |
| कौतुक | कौतुक, मनोरंजक दृश्य | amusing spectacles |
| बिबिध | अनेक प्रकार के | of various kinds |
| होहिं | होते हैं | occur |
| मग | मार्ग में | on the road |
| जाता | जाते हुए | while traveling |
2 इहाँ हिमाचल रचेउ बिताना। अति बिचित्र नहिं जाइ बखाना।।
English explanation
Meanwhile, Himachal prepared the wedding pavilion; it was so wondrous that it could not be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इहाँ | इधर | meanwhile, here |
| हिमाचल | पार्वती के पिता हिमाचल ने | Himachal, Parvati’s father |
| रचेउ | रचा, सजाया | constructed and decorated |
| बिताना | विवाह का मंडप या वितान | wedding pavilion or canopy |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| बिचित्र | अद्भुत, अनूठा | wondrous, extraordinary |
| नहिं | नहीं | not |
| जाइ | किया जा सकता | can be |
| बखाना | वर्णन | described |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.94
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 108
- सहायक विषय
- शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 108, 108
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।