बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सेष सहस्त्रसीस जग कारन। जो अवतरेउ भूमि भय टारन।।
मूल पाठ
सेष सहस्त्रसीस जग कारन। जो अवतरेउ भूमि भय टारन।।
सदा सो सानुकूल रह मो पर। कृपासिंधु सौमित्रि गुनाकर।।
स्रोत अभिलेख 1.17 · पुस्तक पृ. 39, 40
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो हजार सिरवाले और जगत्के कारण (हजार सिरोंपर जगत्को धारण कर रखनेवाले) शेषजी हैं, जिन्होंने पृथ्वीका भय दूर करनेके लिये अवतार लिया, वे गुणोंकी खानि कृपासिन्धु सुमित्रानन्दन श्रीलक्ष्मणजी मुझपर सदा प्रसन्न रहें॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 39 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सेष सहस्त्रसीस जग कारन। जो अवतरेउ भूमि भय टारन।।
English explanation
He is the thousand-headed Shesha, the foundation of the world, who descended to dispel the earth’s fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेष | शेषनाग | Shesha, the cosmic serpent |
| सहस्त्रसीस | हजार सिरों वाले | thousand-headed |
| जग | जगत के | of the world |
| कारन | कारण अथवा आधार | cause or foundation |
| जो | जो | who |
| अवतरेउ | अवतरित हुए | descended in embodied form |
| भूमि | पृथ्वी का | the earth’s |
| भय | भय | fear |
| टारन | दूर करने के लिए | to dispel |
2 सदा सो सानुकूल रह मो पर। कृपासिंधु सौमित्रि गुनाकर।।
English explanation
May that son of Sumitra, Lakshmana, an ocean of compassion and a treasury of virtues, always remain gracious toward me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सदा | सदैव | always |
| सो | वे | he |
| सानुकूल | अनुकूल, कृपालु | favorable and gracious |
| रह | रहें | may remain |
| मो | मुझ | me |
| पर | पर | toward |
| कृपासिंधु | करुणा के समुद्र | ocean of compassion |
| सौमित्रि | सुमित्रा के पुत्र लक्ष्मण | Lakshmana, son of Sumitra |
| गुनाकर | गुणों की खान | treasury of virtues |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 39
- सहायक विषय
- श्रीसीताराम-धाम-परिकर-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 39, 40
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।