बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रिपुसूदन पद कमल नमामी। सूर सुसील भरत अनुगामी।।
मूल पाठ
रिपुसूदन पद कमल नमामी। सूर सुसील भरत अनुगामी।।
महावीर बिनवउँ हनुमाना। राम जासु जस आप बखाना।।
स्रोत अभिलेख 1.17 · पुस्तक पृ. 39, 40
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं श्रीशत्रुघ्नजीके चरणकमलोंको प्रणाम करता हूँ, जो बड़े वीर, सुशील और श्रीभरतजीके पीछे चलनेवाले हैं। मैं महावीर श्रीहनुमान्जीकी विनती करता हूँ, जिनके यशका श्रीरामचन्द्रजीने स्वयं (अपने श्रीमुखसे) वर्णन किया है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 39 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रिपुसूदन पद कमल नमामी। सूर सुसील भरत अनुगामी।।
English explanation
I bow to the lotus feet of Shatrughna, who is brave, noble in conduct, and devoted to following Bharata.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रिपुसूदन | शत्रुओं का संहार करने वाले शत्रुघ्न के | of Shatrughna, destroyer of enemies |
| पद | चरण | feet |
| कमल | कमल | lotuses |
| नमामी | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow |
| सूर | वीर | brave |
| सुसील | अच्छे आचरण वाले | noble in conduct |
| भरत | भरत के | Bharata’s |
| अनुगामी | अनुसरण करने वाले | follower |
2 महावीर बिनवउँ हनुमाना। राम जासु जस आप बखाना।।
English explanation
I supplicate the mighty hero Hanuman, whose glory Rama himself has praised.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महावीर | महान वीर | mighty hero |
| बिनवउँ | मैं विनती करता हूँ | I supplicate |
| हनुमाना | हनुमान से | Hanuman |
| राम | राम ने | Rama |
| जासु | जिनका | whose |
| जस | यश | glory |
| आप | स्वयं | himself |
| बखाना | वर्णन और प्रशंसा की | recounted and praised |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 39
- सहायक विषय
- श्रीसीताराम-धाम-परिकर-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 39, 40
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।