बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सेवत तोहि सुलभ फल चारी। बरदायनी पुरारि पिआरी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे [भक्तोंको मुँहमाँगा] वर देनेवाली! हे त्रिपुरके शत्रु शिवजीकी प्रिय पत्नी! आपकी सेवा करनेसे चारों फल सुलभ हो जाते हैं। हे देवि! आपके चरणकमलोंकी पूजा करके देवता, मनुष्य और मुनि सभी सुखी हो जाते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 230 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सेवत तोहि सुलभ फल चारी। बरदायनी पुरारि पिआरी।।
देबि पूजि पद कमल तुम्हारे। सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे।।
स्रोत अभिलेख 1.236 · पुस्तक पृ. 230, 231
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सेवत तोहि सुलभ फल चारी। बरदायनी पुरारि पिआरी।।
English explanation
AI draft: By serving you, the four aims of life are readily attained. You grant boons and are beloved of Shiva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेवत | सेवा करने से | by serving |
| तोहि | तुम्हारी; तुम्हें | you |
| सुलभ | सहज प्राप्त | readily attainable |
| फल | पुरुषार्थरूपी फल | fruits, the aims of life |
| चारी | चारों | all four |
| बरदायनी | वर देने वाली | giver of boons |
| पुरारि | त्रिपुर का विनाश करने वाले शिव | Shiva, destroyer of Tripura |
| पिआरी | प्रिया | beloved |
2 देबि पूजि पद कमल तुम्हारे। सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे।।
English explanation
O Goddess, by worshipping your lotus-like feet, gods, humans, and sages all become happy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देबि | हे देवी | O Goddess |
| पूजि | पूजा करके | having worshipped |
| पद | चरण | feet |
| कमल | कमल जैसे | lotus-like |
| तुम्हारे | तुम्हारे | your |
| सुर | देवता | gods |
| नर | मनुष्य | humans |
| मुनि | मुनि | sages |
| सब | सभी | all |
| होहिं | होते हैं | become |
| सुखारे | सुखी | happy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.236
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 230
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 230, 231
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।