बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मोर मनोरथु जानहु नीकें। बसहु सदा उर पुर सबही कें।।
मूल पाठ
मोर मनोरथु जानहु नीकें। बसहु सदा उर पुर सबही कें।।
कीन्हेउँ प्रगट न कारन तेहीं। अस कहि चरन गहे बैदेहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.236 · पुस्तक पृ. 230, 231
भावार्थ
मूल पाठ के बादमेरे मनोरथको आप भलीभाँति जानती हैं; क्योंकि आप सदा सबके हृदयरूपी नगरीमें निवास करती हैं। इसी कारण मैंने उसको प्रकट नहीं किया। ऐसा कहकर जानकीजीने उनके चरण पकड़ लिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 230 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मोर मनोरथु जानहु नीकें। बसहु सदा उर पुर सबही कें।।
English explanation
You know my wish fully; you always dwell in the heart-city of everyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोर | मेरा | my |
| मनोरथु | मन की इच्छा | heart's wish |
| जानहु | तुम जानती हो | you know |
| नीकें | भलीभाँति | fully well |
| बसहु | तुम निवास करती हो | you dwell |
| सदा | सदा | always |
| उर | हृदय | heart |
| पुर | नगर में | in the city |
| सबही | सभी | everyone |
| कें | के | of |
2 कीन्हेउँ प्रगट न कारन तेहीं। अस कहि चरन गहे बैदेहीं।।
English explanation
For that reason I did not express my wish. Saying this, Sita clasped the Goddess's feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीन्हेउँ | मैंने किया | I did |
| प्रगट | प्रकट | express openly |
| न | नहीं | not |
| कारन | कारण से | for the reason |
| तेहीं | उसी | that very |
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| चरन | चरण | feet |
| गहे | पकड़ लिए | clasped |
| बैदेहीं | विदेह की पुत्री सीता ने | Sita, daughter of the king of Videha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.236
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 230
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 230, 231
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।