बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सेज रुचिर रचि रामु उठाए। प्रेम समेत पलँग पौढ़ाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइस प्रकार सुन्दर शय्या सजाकर [माताओंने] श्रीरामचन्द्रजीको उठाया और प्रेमसहित पलँगपर पौढ़ाया। श्रीरामजीने बार-बार भाइयोंको आज्ञा दी। तब वे भी अपनी-अपनी शय्याओंपर सो गये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 336 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सेज रुचिर रचि रामु उठाए। प्रेम समेत पलँग पौढ़ाए।।
अग्या पुनि पुनि भाइन्ह दीन्ही। निज निज सेज सयन तिन्ह कीन्ही।।
स्रोत अभिलेख 1.356 · पुस्तक पृ. 336, 336
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सेज रुचिर रचि रामु उठाए। प्रेम समेत पलँग पौढ़ाए।।
English explanation
After arranging a lovely bed, they helped Rama up and lovingly laid him on it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेज | शय्या | bed |
| रुचिर | सुंदर | lovely |
| रचि | सजाकर | having arranged |
| रामु | राम को | Rama |
| उठाए | उठाया | helped up |
| प्रेम | प्रेम | love |
| समेत | सहित | with |
| पलँग | पलंग पर | on the bed |
| पौढ़ाए | लिटाया | laid down |
2 अग्या पुनि पुनि भाइन्ह दीन्ही। निज निज सेज सयन तिन्ह कीन्ही।।
English explanation
The brothers were then repeatedly told to retire, and they lay down on their respective beds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अग्या | आज्ञा | instruction |
| पुनि | फिर; बार-बार | again |
| पुनि | फिर; बार-बार | again |
| भाइन्ह | भाइयों को | to the brothers |
| दीन्ही | दी | gave |
| निज | अपनी | their own |
| निज | अपनी-अपनी | respective |
| सेज | सेज पर | on beds |
| सयन | शयन | repose |
| तिन्ह | उन्होंने | they |
| कीन्ही | किया | took |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.356
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 336
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 336, 336
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।