बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उपबरहन बर बरनि न जाहीं। स्त्रग सुगंध मनिमंदिर माहीं।।
मूल पाठ
उपबरहन बर बरनि न जाहीं। स्त्रग सुगंध मनिमंदिर माहीं।।
रतनदीप सुठि चारु चँदोवा। कहत न बनइ जान जेहिं जोवा।।
स्रोत अभिलेख 1.356 · पुस्तक पृ. 336, 336
भावार्थ
मूल पाठ के बादसुन्दर तकियोंका वर्णन नहीं किया जा सकता। मणियोंके मन्दिरमें फूलोंकी मालाएँ और सुगन्ध द्रव्य सजे हैं। सुन्दर रत्नोंके दीपकों और सुन्दर चँदोवेकी शोभा कहते नहीं बनती। जिसने उन्हें देखा हो, वही जान सकता है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 336 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 उपबरहन बर बरनि न जाहीं। स्त्रग सुगंध मनिमंदिर माहीं।।
English explanation
The excellent pillows were beyond description; the gem-adorned chamber contained flower garlands and fragrance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उपबरहन | तकिए | pillows |
| बर | उत्तम | excellent |
| बरनि | वर्णन किए | described |
| न | नहीं | not |
| जाहीं | जा सकते | can be |
| स्त्रग | पुष्पमालाएँ | flower garlands |
| सुगंध | सुगंध | fragrance |
| मनिमंदिर | रत्नजटित कक्ष | gem-adorned chamber |
| माहीं | के भीतर | within |
2 रतनदीप सुठि चारु चँदोवा। कहत न बनइ जान जेहिं जोवा।।
English explanation
There were gem lamps and an exceptionally beautiful canopy. Their splendor cannot be expressed; only one who saw it knows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रतनदीप | रत्नों के दीप | gem lamps |
| सुठि | अत्यंत | exceedingly |
| चारु | सुंदर | beautiful |
| चँदोवा | पलंग के ऊपर का वितान | bed canopy |
| कहत | कहते हुए; वर्णन करना | to describe |
| न | नहीं | not |
| बनइ | बन पड़ता | is possible |
| जान | जानता है | knows |
| जेहिं | जिसने | whoever |
| जोवा | देखा | saw it |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.356
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 336
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 336, 336
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।