बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सृंगी रिषहि बसिष्ठ बोलावा। पुत्रकाम सुभ जग्य करावा।।
मूल पाठ
सृंगी रिषहि बसिष्ठ बोलावा। पुत्रकाम सुभ जग्य करावा।।
भगति सहित मुनि आहुति दीन्हें। प्रगटे अगिनि चरू कर लीन्हें।।
स्रोत अभिलेख 1.189 · पुस्तक पृ. 189, 190
भावार्थ
मूल पाठ के बादवसिष्ठजीने शृङ्गी ऋषिको बुलवाया और उनसे शुभ पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराया। मुनिके भक्तिसहित आहुतियाँ देनेपर अग्निदेव हाथमें चरु (हविष्यान्न खीर) लिये प्रकट हुए॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 190 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सृंगी रिषहि बसिष्ठ बोलावा। पुत्रकाम सुभ जग्य करावा।।
English explanation
Vasishtha summoned the sage Shringi and had an auspicious sacrifice performed for the desire for sons.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सृंगी | शृंगी, ऋष्यशृंग ऋषि | Shringi, the sage Rishyashringa |
| रिषहि | ऋषि को | the sage |
| बसिष्ठ | वसिष्ठ ने | Vasishtha |
| बोलावा | बुलाया | summoned |
| पुत्रकाम | पुत्र की कामना के लिए | for obtaining sons |
| सुभ | शुभ | auspicious |
| जग्य | यज्ञ | sacrificial rite |
| करावा | करवाया | had performed |
2 भगति सहित मुनि आहुति दीन्हें। प्रगटे अगिनि चरू कर लीन्हें।।
English explanation
The sage offered oblations with devotion. The fire god appeared holding the sacrificial food in his hand.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगति | भक्ति | devotion |
| सहित | के साथ | with |
| मुनि | शृंगी मुनि ने | the sage Shringi |
| आहुति | यज्ञ की आहुतियाँ | sacrificial oblations |
| दीन्हें | दीं | offered |
| प्रगटे | प्रकट हुए | appeared |
| अगिनि | अग्निदेव | the fire god |
| चरू | यज्ञ का पकाया हुआ अन्न, चरु | cooked sacrificial food |
| कर | हाथ में | in his hand |
| लीन्हें | लिए हुए | holding |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.189
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 190
- सहायक विषय
- भगवान्का वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 189, 190
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।