बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निज दुख सुख सब गुरहि सुनायउ। कहि बसिष्ठ बहुबिधि समुझायउ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दराजाने अपना सारा दु:ख-सुख गुरुको सुनाया। गुरु वसिष्ठजीने उन्हें बहुत प्रकारसे समझाया [और कहा—] धीरज धरो, तुम्हारे चार पुत्र होंगे, जो तीनों लोकोंमें प्रसिद्ध और भक्तोंके भयको हरनेवाले होंगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 190 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
निज दुख सुख सब गुरहि सुनायउ। कहि बसिष्ठ बहुबिधि समुझायउ।।
धरहु धीर होइहहिं सुत चारी। त्रिभुवन बिदित भगत भय हारी।।
स्रोत अभिलेख 1.189 · पुस्तक पृ. 189, 190
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 निज दुख सुख सब गुरहि सुनायउ। कहि बसिष्ठ बहुबिधि समुझायउ।।
English explanation
The king told his guru all his sorrows and joys. Vasishtha spoke to him and reassured him in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपना | his own |
| दुख | दुःख | sorrows |
| सुख | सुख | joys |
| सब | सब | all |
| गुरहि | गुरु को | to the guru |
| सुनायउ | सुनाया | related |
| कहि | कहकर | speaking |
| बसिष्ठ | गुरु वसिष्ठ ने | Vasishtha, the royal guru |
| बहुबिधि | अनेक प्रकार से | in many ways |
| समुझायउ | समझाया, आश्वस्त किया | reassured |
2 धरहु धीर होइहहिं सुत चारी। त्रिभुवन बिदित भगत भय हारी।।
English explanation
Be patient; you will have four sons, renowned throughout the three worlds and dispellers of devotees’ fears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरहु | रखो | maintain |
| धीर | धैर्य | patience |
| होइहहिं | होंगे | will be born |
| सुत | पुत्र | sons |
| चारी | चार | four |
| त्रिभुवन | तीनों लोकों में | throughout the three worlds |
| बिदित | प्रसिद्ध | renowned |
| भगत | भक्तों का | of devotees |
| भय | भय | fear |
| हारी | हरने वाले | dispellers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.189
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 190
- सहायक विषय
- भगवान्का वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 189, 190
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।