बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एक बार भूपति मन माहीं। भै गलानि मोरें सुत नाहीं।।
मूल पाठ
एक बार भूपति मन माहीं। भै गलानि मोरें सुत नाहीं।।
गुर गृह गयउ तुरत महिपाला। चरन लागि करि बिनय बिसाला।।
स्रोत अभिलेख 1.189 · पुस्तक पृ. 189, 190
भावार्थ
मूल पाठ के बादएक बार राजाके मनमें बड़ी ग्लानि हुई कि मेरे पुत्र नहीं है। राजा तुरंत ही गुरुके घर गये और चरणोंमें प्रणाम कर बहुत विनय की॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 189 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 एक बार भूपति मन माहीं। भै गलानि मोरें सुत नाहीं।।
English explanation
AI draft: Once King Dasharatha felt distressed at heart: “I have no son.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक | one |
| बार | अवसर पर | occasion |
| भूपति | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| मन | मन | heart |
| माहीं | में | within |
| भै | हुई | arose |
| गलानि | दुःख, खेद | distress |
| मोरें | मेरे | I have |
| सुत | पुत्र | son |
| नाहीं | नहीं है | none |
2 गुर गृह गयउ तुरत महिपाला। चरन लागि करि बिनय बिसाला।।
English explanation
The king immediately went to his guru’s home, bowed at his feet, and made an earnest plea.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु वसिष्ठ का | of his guru, Vasishtha |
| गृह | घर | home |
| गयउ | गए | went |
| तुरत | तुरंत | immediately |
| महिपाला | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| चरन | चरणों में | at his feet |
| लागि | प्रणाम करके | bowing |
| करि | करके | making |
| बिनय | विनती | a plea |
| बिसाला | बड़ी, विस्तृत | earnest and extensive |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.189
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 189
- सहायक विषय
- भगवान्का वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 189, 190
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।