बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुभग द्वार सब कुलिस कपाटा। भूप भीर नट मागध भाटा।।
मूल पाठ
सुभग द्वार सब कुलिस कपाटा। भूप भीर नट मागध भाटा।।
बनी बिसाल बाजि गज साला। हय गय रथ संकुल सब काला।।
स्रोत अभिलेख 1.214 · पुस्तक पृ. 212, 213
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजमहलके सब दरवाजे (फाटक) सुन्दर हैं, जिनमें वज्रके (मजबूत अथवा हीरोंके चमकते हुए) किवाड़ लगे हैं। वहाँ [मातहत] राजाओं, नटों, मागधों और भाटोंकी भीड़ लगी रहती है। घोड़ों और हाथियोंके लिये बहुत बड़ी-बड़ी घुड़शालें और गजशालाएँ (फीलखाने) बनी हुई हैं; जो सब समय घोड़े, हाथी और रथोंसे भरी रहती हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 212 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुभग द्वार सब कुलिस कपाटा। भूप भीर नट मागध भाटा।।
English explanation
AI draft: All the gateways were beautiful, with doors as hard as adamant. There were crowds of kings, performers, royal panegyrists, and bards.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुभग | सुंदर | beautiful |
| द्वार | द्वार | gateways |
| सब | सभी | all |
| कुलिस | वज्र के समान दृढ़ | adamant-hard |
| कपाटा | किवाड़ | door leaves |
| भूप | राजा | kings |
| भीर | भीड़ | crowd |
| नट | नट और करतब दिखाने वाले | actors and acrobats |
| मागध | राजाओं की प्रशंसा करने वाले गायक | royal panegyrists |
| भाटा | वंश और यश गाने वाले भाट | bards recounting lineage and glory |
2 बनी बिसाल बाजि गज साला। हय गय रथ संकुल सब काला।।
English explanation
Spacious stables and elephant houses had been built; they were always filled with horses, elephants, and chariots.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बनी | बनी हुई थीं | had been built |
| बिसाल | विशाल | spacious |
| बाजि | घोड़ों की | for horses |
| गज | हाथियों की | for elephants |
| साला | शालाएँ, रखने के भवन | housing sheds |
| हय | घोड़े | horses |
| गय | हाथी | elephants |
| रथ | रथ | chariots |
| संकुल | भरी हुई | filled with |
| सब | सभी | all |
| काला | समयों में | at times |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.214
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 212
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका जनकपुरमें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 212, 213
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।