बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए। बिपुल बिसद निगमागम गाए।।
मूल पाठ
सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए। बिपुल बिसद निगमागम गाए।।
हरि अवतार हेतु जेहि होई। इदमित्थं कहि जाइ न सोई।।
स्रोत अभिलेख 1.121 · पुस्तक पृ. 133, 133
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे पार्वती! सुनो, वेद-शास्त्रोंने श्रीहरिके सुन्दर, विस्तृत और निर्मल चरित्रोंका गान किया है। हरिका अवतार जिस कारणसे होता है, वह कारण 'बस यही है ऐसा नहीं कहा जा सकता (अनेकों कारण हो सकते हैं और ऐसे भी हो सकते हैं जिन्हें कोई जान ही नहीं सकता)॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 133 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए। बिपुल बिसद निगमागम गाए।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: Listen, Girija! Hari’s beautiful deeds are vast and pure; the Vedas and Agamas sing of them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| गिरिजा | हे पार्वती, पर्वतराज की पुत्री | O Parvati, daughter of the mountain king |
| हरिचरित | हरि के चरित्र और लीलाएँ | Hari’s deeds and divine acts |
| सुहाए | सुंदर और मनोहर | beautiful and delightful |
| बिपुल | विस्तृत, प्रचुर | vast, abundant |
| बिसद | निर्मल, पवित्र | pure, unblemished |
| निगमागम | वेद और आगम शास्त्र | the Vedas and Agama scriptures |
| गाए | गाए हैं | have sung |
2 हरि अवतार हेतु जेहि होई। इदमित्थं कहि जाइ न सोई।।
English explanation
The reason for Hari’s incarnation cannot be stated definitively as ‘this alone is it, and this is exactly how it is.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरि | भगवान विष्णु | Lord Vishnu |
| अवतार | अवतरण, देहधारण | incarnation, embodied descent |
| हेतु | कारण | reason |
| जेहि | जिस कारण से | for which reason |
| होई | होता है | occurs |
| इदमित्थं | यही है और ऐसा ही है—निश्चित रूप से | this is it, exactly thus—definitively |
| कहि | कहा | said |
| जाइ | जा सकता | can be |
| न | नहीं | not |
| सोई | वही कारण | that very reason |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.121
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 133
- सहायक विषय
- अवतारके हेतु
- मुद्रित पृष्ठ
- 133, 133
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।