बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि हरषीं सब सखीं सयानी। सिय हियँ अति उतकंठा जानी।।
मूल पाठ
सुनि हरषीं सब सखीं सयानी। सिय हियँ अति उतकंठा जानी।।
एक कहइ नृपसुत तेइ आली। सुने जे मुनि सँग आए काली।।
स्रोत अभिलेख 1.229 · पुस्तक पृ. 224, 225
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह सुनकर और सीताजीके हृदयमें बड़ी उत्कण्ठा जानकर सब सयानी सखियाँ प्रसन्न हुईं। तब एक सखी कहने लगी—हे सखी! ये वही राजकुमार हैं जो सुना है कि कल विश्वामित्र मुनिके साथ आये हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 224 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि हरषीं सब सखीं सयानी। सिय हियँ अति उतकंठा जानी।।
English explanation
Hearing this, all the discerning companions rejoiced and recognized the intense eagerness in Sita’s heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| हरषीं | प्रसन्न हुईं | rejoiced |
| सब | सभी | all |
| सखीं | सखियाँ | female companions |
| सयानी | समझदार | discerning |
| सिय | सीता के | Sita’s |
| हियँ | हृदय में | in the heart |
| अति | अत्यधिक | intense |
| उतकंठा | उत्कंठा | eagerness |
| जानी | पहचान ली | recognized |
2 एक कहइ नृपसुत तेइ आली। सुने जे मुनि सँग आए काली।।
English explanation
One companion says, ‘Friend, these are the very princes we heard had arrived yesterday with the sage.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक सखी | one companion |
| कहइ | कहती है | says |
| नृपसुत | राजा के पुत्र | the king’s sons |
| तेइ | वे ही | those very ones |
| आली | हे सखी | dear friend |
| सुने | जिनके विषय में सुना था | heard about |
| जे | जो | who |
| मुनि | मुनि विश्वामित्र | the sage Vishvamitra |
| सँग | के साथ | with |
| आए | आए थे | had arrived |
| काली | कल, बीते दिन | yesterday |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.229
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 224
- सहायक विषय
- पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका परस्पर दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 224, 225
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।