बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि सरोष भृगुनायकु आए। बहुत भाँति तिन्ह आँखि देखाए।।
मूल पाठ
सुनि सरोष भृगुनायकु आए। बहुत भाँति तिन्ह आँखि देखाए।।
देखि राम बलु निज धनु दीन्हा। करि बहु बिनय गवनु बन कीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 1.293 · पुस्तक पृ. 278, 278
भावार्थ
मूल पाठ के बादधनुष टूटनेकी बात सुनकर परशुरामजी क्रोधभरे आये और उन्होंने बहुत प्रकारसे आँखें दिखलायीं। अन्तमें उन्होंने भी श्रीरामचन्द्रजीका बल देखकर उन्हें अपना धनुष दे दिया और बहुत प्रकारसे विनती करके वनको गमन किया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 278 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि सरोष भृगुनायकु आए। बहुत भाँति तिन्ह आँखि देखाए।।
English explanation
Hearing this, Parashurama of Bhrigu’s lineage arrived in anger and glared threateningly in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सरोष | क्रोध सहित | in anger |
| भृगुनायकु | भृगुवंश के प्रमुख परशुराम | Parashurama, foremost of Bhrigu’s lineage |
| आए | आए | arrived |
| बहुत | अनेक | many |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| तिन्ह | उन्होंने, परशुराम ने | he, Parashurama |
| आँखि | आँखें | eyes |
| देखाए | दिखाईं; क्रोध से घूरा | showed; glared threateningly |
2 देखि राम बलु निज धनु दीन्हा। करि बहु बिनय गवनु बन कीन्हा।।
English explanation
Seeing Rama’s strength, Parashurama gave him his own bow and, after expressing much humility, departed for the forest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| राम | राम का | Rama’s |
| बलु | बल | strength |
| निज | अपना | his own |
| धनु | धनुष | bow |
| दीन्हा | दे दिया | gave |
| करि | करके | having made |
| बहु | बहुत | much |
| बिनय | विनय; नम्र निवेदन | humble entreaty |
| गवनु | प्रस्थान | departure |
| बन | वन को | to the forest |
| कीन्हा | किया | made |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.293
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 278
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 278, 278
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।