बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि मारीच निसाचर क्रोही। लै सहाय धावा मुनिद्रोही।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयह समाचार सुनकर मुनियोंका शत्रु क्रोधी राक्षस मारीच अपने सहायकोंको लेकर दौड़ा। श्रीरामजीने बिना फलवाला बाण उसको मारा, जिससे वह सौ योजनके विस्तारवाले समुद्रके पार जा गिरा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 208 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि मारीच निसाचर क्रोही। लै सहाय धावा मुनिद्रोही।।
बिनु फर बान राम तेहि मारा। सत जोजन गा सागर पारा।।
स्रोत अभिलेख 1.21 · पुस्तक पृ. 208, 209
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि मारीच निसाचर क्रोही। लै सहाय धावा मुनिद्रोही।।
English explanation
Hearing this, the wrathful demon Maricha, an enemy of the sages, rushed forward with his allies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मारीच | मारीच राक्षस | Maricha, the demon |
| निसाचर | राक्षस | demon |
| क्रोही | क्रोधी | wrathful |
| लै | लेकर | taking along |
| सहाय | सहायक | allies |
| धावा | दौड़ा आया | rushed forward |
| मुनिद्रोही | मुनियों का शत्रु | enemy of the sages |
2 बिनु फर बान राम तेहि मारा। सत जोजन गा सागर पारा।।
English explanation
Rama struck him with an arrow without a metal head; he was sent a hundred yojanas away, beyond the sea.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनु | बिना | without |
| फर | बाण का फल या धातु का सिरा | the arrow’s metal head |
| बान | बाण | arrow |
| राम | श्रीराम ने | Rama |
| तेहि | उस मारीच को | him, Maricha |
| मारा | प्रहार किया | struck |
| सत | सौ | a hundred |
| जोजन | योजन दूरी | yojanas of distance |
| गा | जा पहुँचा | went and reached |
| सागर | समुद्र | the sea |
| पारा | पार | beyond |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 208
- सहायक विषय
- विश्वामित्र-यज्ञकी रक्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 208, 209
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।