बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि बिधि बिनय समुझि प्रभु बानी। ऐसेइ होउ कहा सुखु मानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दब्रह्माजीकी प्रार्थना सुनकर और प्रभु श्रीरामचन्द्रजीके वचनोंको याद करके शिवजीने प्रसन्नतापूर्वक कहा—'ऐसा ही हो। तब देवताओंने नगाड़े बजाये और फूलोंकी वर्षा करके 'जय हो! देवताओंके स्वामीकी जय हो! ऐसा कहने लगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 104 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि बिधि बिनय समुझि प्रभु बानी। ऐसेइ होउ कहा सुखु मानी।।
तब देवन्ह दुंदुभीं बजाईं। बरषि सुमन जय जय सुर साई।।
स्रोत अभिलेख 1.89 · पुस्तक पृ. 103, 104
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनि बिधि बिनय समुझि प्रभु बानी। ऐसेइ होउ कहा सुखु मानी।।
English explanation
Hearing Brahma’s petition and understanding his words, Lord Shiva gladly said, ‘Let it be so.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| बिधि | ब्रह्मा की | Brahma’s |
| बिनय | विनती | petition |
| समुझि | समझकर | having understood |
| प्रभु | प्रभु शिव | Lord Shiva |
| बानी | बात; वाणी | words |
| ऐसेइ | ऐसा ही | just so |
| होउ | हो | let it be |
| कहा | कहा | said |
| सुखु | प्रसन्नता | joy |
| मानी | अनुभव करके | having felt |
2 तब देवन्ह दुंदुभीं बजाईं। बरषि सुमन जय जय सुर साई।।
English explanation
Then the gods sounded kettledrums and showered flowers, acclaiming, ‘Glory, glory to the Lord of the gods!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| देवन्ह | देवताओं ने | the gods |
| दुंदुभीं | नगाड़े | kettledrums |
| बजाईं | बजाए | sounded |
| बरषि | बरसाकर | having showered |
| सुमन | फूल | flowers |
| जय | जय हो | glory |
| जय | जय हो | glory |
| सुर | देवताओं के | of the gods |
| साई | स्वामी शिव | Shiva, the Lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.89
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 104
- सहायक विषय
- देवताओंका शिवजीसे ब्याहके लिये प्रार्थना करना, सप्तर्षियोंका पार्वतीके पास जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 103, 104
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।