बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सासति करि पुनि करहिं पसाऊ। नाथ प्रभुन्ह कर सहज सुभाऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे नाथ! श्रेष्ठ स्वामियोंका यह सहज स्वभाव ही है कि वे पहले दण्ड देकर फिर कृपा किया करते हैं। पार्वतीने अपार तप किया है, अब उन्हें अङ्गीकार कीजिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 103 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सासति करि पुनि करहिं पसाऊ। नाथ प्रभुन्ह कर सहज सुभाऊ।।
पारबतीं तपु कीन्ह अपारा। करहु तासु अब अंगीकारा।।
स्रोत अभिलेख 1.89 · पुस्तक पृ. 103, 104
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सासति करि पुनि करहिं पसाऊ। नाथ प्रभुन्ह कर सहज सुभाऊ।।
English explanation
O Lord, it is the natural disposition of masters to show grace after administering punishment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सासति | दंड | punishment |
| करि | देकर | having administered |
| पुनि | फिर | then; again |
| करहिं | करते हैं | they bestow |
| पसाऊ | कृपा | grace; favor |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| प्रभुन्ह | स्वामियों | masters; lords |
| कर | का | of |
| सहज | स्वाभाविक | natural |
| सुभाऊ | स्वभाव | disposition |
2 पारबतीं तपु कीन्ह अपारा। करहु तासु अब अंगीकारा।।
English explanation
Parvati has performed immense austerities; now accept her.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पारबतीं | पार्वती ने | Parvati |
| तपु | तपस्या | austerity |
| कीन्ह | की | performed |
| अपारा | अपार; अत्यधिक | immense |
| करहु | कीजिए | please make |
| तासु | उनका; पार्वती का | of her; of Parvati |
| अब | अब | now |
| अंगीकारा | स्वीकार | acceptance |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.89
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 103
- सहायक विषय
- देवताओंका शिवजीसे ब्याहके लिये प्रार्थना करना, सप्तर्षियोंका पार्वतीके पास जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 103, 104
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।