बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अवसरु जानि सप्तरिषि आए। तुरतहिं बिधि गिरिभवन पठाए।।
मूल पाठ
अवसरु जानि सप्तरिषि आए। तुरतहिं बिधि गिरिभवन पठाए।।
प्रथम गए जहँ रही भवानी। बोले मधुर बचन छल सानी।।
स्रोत अभिलेख 1.89 · पुस्तक पृ. 103, 104
भावार्थ
मूल पाठ के बादउचित अवसर जानकर सप्तॢष आये और ब्रह्माजीने तुरंत ही उन्हें हिमाचलके घर भेज दिया। वे पहले वहाँ गये जहाँ पार्वतीजी थीं और उनसे छलसे भरे मीठे (विनोदयुक्त, आनन्द पहुँचानेवाले) वचन बोले—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 104 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अवसरु जानि सप्तरिषि आए। तुरतहिं बिधि गिरिभवन पठाए।।
English explanation
Recognizing the right moment, the seven sages arrived; Brahma immediately sent them to Himavan’s home.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवसरु | उचित अवसर | the right moment |
| जानि | जानकर | recognizing |
| सप्तरिषि | सात महान ऋषि | the seven great sages |
| आए | आए | arrived |
| तुरतहिं | तुरंत ही | immediately |
| बिधि | ब्रह्मा ने | Brahma |
| गिरिभवन | पर्वतराज हिमवान के घर | to mountain-king Himavan’s home |
| पठाए | उन्हें भेजा | sent them |
2 प्रथम गए जहँ रही भवानी। बोले मधुर बचन छल सानी।।
English explanation
They first went where Parvati was staying and spoke sweet words mingled with deception.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रथम | पहले | first |
| गए | वे गए | they went |
| जहँ | जहाँ | where |
| रही | रह रही थीं | was staying |
| भवानी | पार्वती | Parvati |
| बोले | उन्होंने बोले | they spoke |
| मधुर | मीठे | sweet |
| बचन | वचन; बातें | words |
| छल | छल से | with deception |
| सानी | मिले हुए | mingled; imbued |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.89
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 104
- सहायक विषय
- देवताओंका शिवजीसे ब्याहके लिये प्रार्थना करना, सप्तर्षियोंका पार्वतीके पास जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 103, 104
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।