बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि अवलोकि सुचित चख चाही। भगति मोरि मति स्वामि सराही।।
मूल पाठ
सुनि अवलोकि सुचित चख चाही। भगति मोरि मति स्वामि सराही।।
कहत नसाइ होइ हियँ नीकी। रीझत राम जानि जन जी की।।
स्रोत अभिलेख 1.29 · पुस्तक पृ. 50, 51
भावार्थ
मूल पाठ के बादवरं मेरे प्रभु श्रीरामचन्द्रजीने तो इस बातको सुनकर, देखकर और अपने सुचित्तरूपी चक्षुसे निरीक्षण कर मेरी भक्ति और बुद्धिकी [उलटे] सराहना की। क्योंकि कहनेमें चाहे बिगड़ जाय (अर्थात् मैं चाहे अपनेको भगवान्का सेवक कहता-कहलाता रहूँ ), परंतु हृदयमें अच्छापन होना चाहिये। (हृदयमें तो अपनेको उनका सेवक बनने योग्य नहीं मानकर पापी और दीन ही मानता हूँ, यह अच्छापन है।) श्रीरामचन्द्रजी भी दासके हृदयकी [अच्छी] स्थिति जानकर रीझ जाते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 50 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि अवलोकि सुचित चख चाही। भगति मोरि मति स्वामि सराही।।
English explanation
Having heard and observed, the Lord looked upon me with a pure gaze and praised my understanding as devotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| अवलोकि | देखकर | having observed |
| सुचित | निर्मल | pure |
| चख | नेत्रों से | with eyes |
| चाही | देखा | looked upon |
| भगति | भक्ति मानकर | as devotion |
| मोरि | मेरी | my |
| मति | बुद्धि | understanding |
| स्वामि | स्वामी राम ने | the Lord Rama |
| सराही | प्रशंसा की | praised |
2 कहत नसाइ होइ हियँ नीकी। रीझत राम जानि जन जी की।।
English explanation
Even if one's expression goes awry, when the feeling in the heart is good, Rama understands his servant's intention and is pleased.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते समय | while speaking |
| नसाइ | बिगड़ जाए | goes awry |
| होइ | हो | is |
| हियँ | हृदय में | in the heart |
| नीकी | अच्छी भावना | good feeling |
| रीझत | प्रसन्न होते हैं | is pleased |
| राम | भगवान राम | Rama |
| जानि | जानकर | knowing |
| जन | सेवक के | the servant's |
| जी | मन | heart |
| की | की बात | intention of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 50
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 50, 51
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।