बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रहति न प्रभु चित चूक किए की। करत सुरति सय बार हिए की।।
मूल पाठ
रहति न प्रभु चित चूक किए की। करत सुरति सय बार हिए की।।
जेहिं अघ बधेउ ब्याध जिमि बाली। फिरि सुकंठ सोइ कीन्ह कुचाली।।
स्रोत अभिलेख 1.29 · पुस्तक पृ. 50, 51
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभुके चित्तमें अपने भक्तोंकी की हुई भूल-चूक याद नहीं रहती (वे उसे भूल जाते हैं) और उनके हृदय [की अच्छाई—नीकी] को सौ-सौ बार याद करते रहते हैं। जिस पापके कारण उन्होंने बालिको व्याधकी तरह मारा था, वैसी ही कुचाल फिर सुग्रीवने चली॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 51 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रहति न प्रभु चित चूक किए की। करत सुरति सय बार हिए की।।
English explanation
The Lord does not retain the faults of one's deeds in his mind; he remembers the heart's good intention a hundred times.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रहति | रहती | remains |
| न | नहीं | not |
| प्रभु | प्रभु के | the Lord's |
| चित | चित्त में | in mind |
| चूक | भूल | fault |
| किए | किए हुए कार्य | deeds performed |
| की | की | of |
| करत | करते हैं | makes |
| सुरति | स्मरण | remembrance |
| सय | सौ | a hundred |
| बार | बार | times |
| हिए | हृदय की भावना | the heart's intention |
| की | का | of |
2 जेहिं अघ बधेउ ब्याध जिमि बाली। फिरि सुकंठ सोइ कीन्ह कुचाली।।
English explanation
The very sin for which Rama killed Bali like a hunter was later committed by Sugriva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहिं | जिसके कारण | because of which |
| अघ | पाप | sin |
| बधेउ | मार डाला | killed |
| ब्याध | व्याध | hunter |
| जिमि | की तरह | like |
| बाली | वानरराज बालि को | Bali, the monkey king |
| फिरि | फिर | afterward |
| सुकंठ | सुग्रीव ने | Sugriva |
| सोइ | वही | that very |
| कीन्ह | किया | committed |
| कुचाली | दुराचार | misconduct |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 51
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 50, 51
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।