बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोइ करतूति बिभीषन केरी। सपनेहुँ सो न राम हियँ हेरी।।
मूल पाठ
सोइ करतूति बिभीषन केरी। सपनेहुँ सो न राम हियँ हेरी।।
ते भरतहि भेंटत सनमाने। राजसभाँ रघुबीर बखाने।।
स्रोत अभिलेख 1.29 · पुस्तक पृ. 50, 51
भावार्थ
मूल पाठ के बादवही करनी विभीषणकी थी, परन्तु श्रीरामचन्द्रजीने स्वप्रमें भी उसका मनमें विचार नहीं किया। उलटे भरतजीसे मिलनेके समय श्रीरघुनाथजीने उनका सम्मान किया और राजसभामें भी उनके गुणोंका बखान किया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 51 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सोइ करतूति बिभीषन केरी। सपनेहुँ सो न राम हियँ हेरी।।
English explanation
Vibhishana's conduct was the same; yet Rama did not regard that fault in his heart, even in a dream.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | the same |
| करतूति | करनी | conduct |
| बिभीषन | रावण के भाई विभीषण | Vibhishana, Ravana's brother |
| केरी | की | of |
| सपनेहुँ | सपने में भी | even in a dream |
| सो | उस दोष को | that fault |
| न | नहीं | not |
| राम | राम ने | Rama |
| हियँ | हृदय में | in his heart |
| हेरी | देखा | regarded |
2 ते भरतहि भेंटत सनमाने। राजसभाँ रघुबीर बखाने।।
English explanation
When meeting Bharata, Rama honored those two and praised them in the royal assembly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | उन दोनों को | those two |
| भरतहि | भरत से | Bharata, Rama's brother |
| भेंटत | मिलते समय | when meeting |
| सनमाने | सम्मान दिया | honored |
| राजसभाँ | राजसभा में | in the royal assembly |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम ने | Rama, hero of Raghu's line |
| बखाने | प्रशंसा की | praised |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 51
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 50, 51
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