बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति बड़ि मोरि ढिठाई खोरी। सुनि अघ नरकहुँ नाक सकोरी।।
मूल पाठ
अति बड़ि मोरि ढिठाई खोरी। सुनि अघ नरकहुँ नाक सकोरी।।
समुझि सहम मोहि अपडर अपनें। सो सुधि राम कीन्हि नहिं सपनें।।
स्रोत अभिलेख 1.29 · पुस्तक पृ. 50, 51
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह मेरी बहुत बड़ी ढिठाई और दोष है, मेरे पापको सुनकर नरकने भी नाक सिकोड़ ली है (अर्थात् नरकमें भी मेरे लिये ठौर नहीं है)। यह समझकर मुझे अपने ही कल्पित डरसे डर हो रहा है, किंतु भगवान् श्रीरामचन्द्रजीने तो स्वप्नमें भी इसपर (मेरी इस ढिठाई और दोषपर) ध्यान नहीं दिया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 50 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अति बड़ि मोरि ढिठाई खोरी। सुनि अघ नरकहुँ नाक सकोरी।।
English explanation
My impudence and faults are immense; hearing of my sins, even hell turned up its nose.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | बहुत | very |
| बड़ि | बड़ी | great |
| मोरि | मेरी | my |
| ढिठाई | धृष्टता | impudence |
| खोरी | दोष | fault |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| अघ | पाप | sins |
| नरकहुँ | नरक ने भी | even hell |
| नाक | नाक | nose |
| सकोरी | सिकोड़ ली | turned up |
2 समुझि सहम मोहि अपडर अपनें। सो सुधि राम कीन्हि नहिं सपनें।।
English explanation
Reflecting on the dread caused by my own faults, I shrink in fear; Rama never took notice of them, even in a dream.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समुझि | समझकर | reflecting on |
| सहम | सहम जाता हूँ | I shrink in fear |
| मोहि | मुझे | to me |
| अपडर | अपने दोषों का भय | fear of one's own faults |
| अपनें | अपने | my own |
| सो | उन दोषों की | of those faults |
| सुधि | ध्यान | notice |
| राम | भगवान राम ने | Rama |
| कीन्हि | किया | took |
| नहिं | नहीं | not |
| सपनें | सपने में भी | even in a dream |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 50
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 50, 51
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।