बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि अनुकथन परस्पर होई। पथिक समाज सोह सरि सोई।।
मूल पाठ
सुनि अनुकथन परस्पर होई। पथिक समाज सोह सरि सोई।।
घोर धार भृगुनाथ रिसानी। घाट सुबद्ध राम बर बानी।।
स्रोत अभिलेख 1.41 · पुस्तक पृ. 63, 64
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस कथाको सुनकर पीछे जो आपसमें चर्चा होती है, वही इस नदीके सहारे-सहारे चलनेवाले यात्रियोंका समाज शोभा पा रहा है। परशुरामजीका क्रोध इस नदीकी भयानक धारा है और श्रीरामचन्द्रजीके श्रेष्ठ वचन ही सुन्दर बँधे हुए घाट हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 64 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनि अनुकथन परस्पर होई। पथिक समाज सोह सरि सोई।।
English explanation
The mutual retelling after listening is the company of travelers gracing this river.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| अनुकथन | सुनी कथा का पुनः कथन | retelling what was heard |
| परस्पर | एक-दूसरे से | with one another |
| होई | होता है | takes place |
| पथिक | यात्री | travelers |
| समाज | समुदाय | company |
| सोह | शोभा देता है | graces |
| सरि | नदी पर | on the river |
| सोई | वही | that very |
2 घोर धार भृगुनाथ रिसानी। घाट सुबद्ध राम बर बानी।।
English explanation
Parashurama’s anger is the river’s fierce current, and Rama’s excellent words are its well-built landing steps.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| घोर | भयंकर | fierce |
| धार | धारा | current |
| भृगुनाथ | भृगुवंशी परशुराम का | of Parashurama, of Bhrigu’s lineage |
| रिसानी | क्रोध | anger |
| घाट | नदी के घाट | river landing steps |
| सुबद्ध | अच्छी तरह बने हुए | well-built |
| राम | राम की | of Rama |
| बर | श्रेष्ठ | excellent |
| बानी | वाणी | words |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.41
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 64
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 63, 64
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।