बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुत समूह जन परिजन नाती। गे को पार निसाचर जाती।।
मूल पाठ
सुत समूह जन परिजन नाती। गे को पार निसाचर जाती।।
सेन बिलोकि सहज अभिमानी। बोला बचन क्रोध मद सानी।।
स्रोत अभिलेख 1.181 · पुस्तक पृ. 181, 182
भावार्थ
मूल पाठ के बादपुत्र-पौत्र, कुटुम्बी और सेवक ढेर-के-ढेर थे। [सारी] राक्षसोंकी जातियोंको तो गिन ही कौन सकता था? अपनी सेनाको देखकर स्वभावसे ही अभिमानी रावण क्रोध और गर्वमें सनी हुई वाणी बोला—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 181 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1सुत समूह जन परिजन नाती। गे को पार निसाचर जाती।।
English explanation
Sons in great numbers, servants, relatives, and grandsons—who could reckon the extent of that demon host?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुत | पुत्र | sons |
| समूह | समूह; बड़ी संख्या | groups; great numbers |
| जन | सेवक; अनुचर | servants; attendants |
| परिजन | परिवारजन | relatives |
| नाती | नाती; पौत्र-दौहित्र | grandsons |
| गे | पहुँच सके; पा सके | could reach; could reckon |
| को | कौन | who |
| पार | अंत; सीमा | end; limit |
| निसाचर | राक्षस | demons; night-roamers |
| जाती | जाति; समुदाय | race; community |
2सेन बिलोकि सहज अभिमानी। बोला बचन क्रोध मद सानी।।
English explanation
Seeing his army, Ravana, proud by nature, spoke words steeped in anger and arrogance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेन | सेना | army |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| सहज | स्वभाव से | by nature |
| अभिमानी | अभिमानी | proud |
| बोला | बोला | spoke |
| बचन | वचन; बातें | words |
| क्रोध | क्रोध | anger |
| मद | अहंकार का मद | intoxication with pride |
| सानी | सने हुए | steeped in |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.181
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 181
- सहायक विषय
- रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
- मुद्रित पृष्ठ
- 181, 182
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