बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुक सनकादि भगत मुनि नारद। जे मुनिबर बिग्यान बिसारद।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दशुकदेवजी, सनकादि, नारदमुनि आदि जितने भक्त और परम ज्ञानी श्रेष्ठ मुनि हैं, मैं धरतीपर सिर टेककर उन सबको प्रणाम करता हूँ; हे मुनीश्वरो! आप सब मुझको अपना दास जानकर कृपा कीजिये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 40 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुक सनकादि भगत मुनि नारद। जे मुनिबर बिग्यान बिसारद।।
प्रनवउँ सबहिं धरनि धरि सीसा। करहु कृपा जन जानि मुनीसा।।
स्रोत अभिलेख 1.18 · पुस्तक पृ. 40, 40
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुक सनकादि भगत मुनि नारद। जे मुनिबर बिग्यान बिसारद।।
English explanation
Shukadeva, Sanaka and the others, the devoted sage Narada, and all eminent sages skilled in realized knowledge—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुक | मुनि शुकदेव | the sage Shukadeva |
| सनकादि | सनक और अन्य कुमार मुनि | Sanaka and the other Kumara sages |
| भगत | भक्त | devoted |
| मुनि | ऋषि | sage |
| नारद | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| जे | जो भी | all who |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि | eminent sages |
| बिग्यान | अनुभूत आध्यात्मिक ज्ञान में | in realized spiritual knowledge |
| बिसारद | निपुण | proficient |
2 प्रनवउँ सबहिं धरनि धरि सीसा। करहु कृपा जन जानि मुनीसा।।
English explanation
Placing my head on the earth, I bow to them all. O eminent sages, be gracious to me, knowing me as your servant.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रनवउँ | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow |
| सबहिं | सबको | to all |
| धरनि | धरती पर | on the earth |
| धरि | रखकर | placing |
| सीसा | सिर | my head |
| करहु | कीजिए | please show |
| कृपा | कृपा | grace |
| जन | अपना सेवक | your servant |
| जानि | जानकर | recognizing as |
| मुनीसा | हे श्रेष्ठ मुनियो | O eminent sages |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 40
- सहायक विषय
- श्रीसीताराम-धाम-परिकर-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 40, 40
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।