बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीस जटा ससिबदनु सुहावा। रिसबस कछुक अरुन होइ आवा।।
मूल पाठ
सीस जटा ससिबदनु सुहावा। रिसबस कछुक अरुन होइ आवा।।
भृकुटी कुटिल नयन रिस राते। सहजहुँ चितवत मनहुँ रिसाते।।
स्रोत अभिलेख 1.268 · पुस्तक पृ. 258, 258
भावार्थ
मूल पाठ के बादसिरपर जटा है, सुन्दर मुखचन्द्र क्रोधके कारण कुछ लाल हो आया है। भौंहें टेढ़ी और आँखें क्रोधसे लाल हैं। सहज ही देखते हैं, तो भी ऐसा जान पड़ता है मानो क्रोध कर रहे हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 258 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सीस जटा ससिबदनु सुहावा। रिसबस कछुक अरुन होइ आवा।।
English explanation
He had matted locks on his head; his beautiful moonlike face had become somewhat red with anger.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीस | सिर पर | on the head |
| जटा | जटाएँ | matted locks |
| ससिबदनु | चंद्रमा-जैसा मुख | moonlike face |
| सुहावा | सुंदर; मनोहर | beautiful; charming |
| रिसबस | क्रोध के वश होकर | under the sway of anger |
| कछुक | कुछ; थोड़ा | somewhat; a little |
| अरुन | लाल; अरुण | reddish |
| होइ | होकर | becoming |
| आवा | हो आया था | had come to be |
2 भृकुटी कुटिल नयन रिस राते। सहजहुँ चितवत मनहुँ रिसाते।।
English explanation
His brows were bent and his eyes red with anger; even when looking naturally, he seemed angry.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भृकुटी | भौंहें | brows |
| कुटिल | टेढ़ी; तनी हुई | bent; drawn |
| नयन | आँखें | eyes |
| रिस | क्रोध से | with anger |
| राते | लाल; रंगे हुए | reddened; suffused |
| सहजहुँ | सहज रूप से भी | even naturally |
| चितवत | देखते हुए | while looking |
| मनहुँ | मानो | as if |
| रिसाते | क्रोधित हों | were angry |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.268
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 258
- सहायक विषय
- जयमाल पहनाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 258, 258
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