बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सिव सम को रघुपति ब्रतधारी। बिनु अघ तजी सती असि नारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दशिवजीके समान रघुनाथजी [की भक्ति] का व्रत धारण करनेवाला कौन है? जिन्होंने बिना ही पापके सती-जैसी स्त्रीको त्याग दिया और प्रतिज्ञा करके श्रीरघुनाथजीकी भक्तिको दिखा दिया। हे भाई! श्रीरामचन्द्रजीको शिवजीके समान और कौन प्यारा है?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 119 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सिव सम को रघुपति ब्रतधारी। बिनु अघ तजी सती असि नारी।।
पनु करि रघुपति भगति देखाई। को सिव सम रामहि प्रिय भाई।।
स्रोत अभिलेख 1.104 · पुस्तक पृ. 118, 119
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सिव सम को रघुपति ब्रतधारी। बिनु अघ तजी सती असि नारी।।
English explanation
Who keeps a vow of devotion to Rama as Shiva does? Though himself without sin, he renounced a wife such as Sati.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिव | शिव | Shiva |
| सम | के समान | like |
| को | कौन | who |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम के प्रति | toward Rama, lord of Raghu’s line |
| ब्रतधारी | व्रत निभाने वाला | one who steadfastly keeps a vow |
| बिनु | बिना | without |
| अघ | पाप; दोष | sin; fault |
| तजी | त्याग दिया | renounced |
| सती | शिव की पत्नी सती | Sati, Shiva’s wife |
| असि | जैसी | such as |
| नारी | पत्नी | wife |
2 पनु करि रघुपति भगति देखाई। को सिव सम रामहि प्रिय भाई।।
English explanation
By making a solemn vow, he demonstrated his devotion to Rama. Brother, who is as dear to Rama as Shiva?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पनु | प्रतिज्ञा | solemn vow |
| करि | करके | having made |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम के प्रति | to Rama, lord of Raghu’s line |
| भगति | भक्ति | devotion |
| देखाई | दिखाई; प्रकट की | demonstrated |
| को | कौन | who |
| सिव | शिव | Shiva |
| सम | के समान | as much as |
| रामहि | राम को | to Rama |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| भाई | हे भाई | O brother |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.104
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 119
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 118, 119
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।