बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सिव पद कमल जिन्हहि रति नाहीं। रामहि ते सपनेहुँ न सोहाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दशिवजीके चरणकमलोंमें जिनकी प्रीति नहीं है, वे श्रीरामचन्द्रजीको स्वप्नमें भी अच्छे नहीं लगते। विश्वनाथ श्रीशिवजीके चरणोंमें निष्कपट (विशुद्ध) प्रेम होना यही रामभक्तका लक्षण है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 118 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सिव पद कमल जिन्हहि रति नाहीं। रामहि ते सपनेहुँ न सोहाहीं।।
बिनु छल बिस्वनाथ पद नेहू। राम भगत कर लच्छन एहू।।
स्रोत अभिलेख 1.104 · पुस्तक पृ. 118, 119
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सिव पद कमल जिन्हहि रति नाहीं। रामहि ते सपनेहुँ न सोहाहीं।।
English explanation
Those who have no love for Shiva’s lotus feet are not pleasing to Rama even in a dream.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिव | शिव के | Shiva’s |
| पद | चरण | feet |
| कमल | कमल; कमल के समान | lotuses; lotus-like |
| जिन्हहि | जिन्हें | those who have |
| रति | प्रेम | love |
| नाहीं | नहीं है | have none |
| रामहि | राम को | to Rama |
| ते | वे | they |
| सपनेहुँ | सपने में भी | even in a dream |
| न | नहीं | not |
| सोहाहीं | सुहाते; प्रिय लगते | are pleasing |
2 बिनु छल बिस्वनाथ पद नेहू। राम भगत कर लच्छन एहू।।
English explanation
Sincere love for the feet of Shiva, Lord of the universe—this is the mark of a devotee of Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनु | बिना | without |
| छल | कपट | deceit |
| बिस्वनाथ | विश्व के स्वामी शिव के | of Shiva, Lord of the universe |
| पद | चरणों में | for the feet |
| नेहू | प्रेम | love |
| राम | राम के | of Rama |
| भगत | भक्त | devotee |
| कर | का | of |
| लच्छन | लक्षण; पहचान | mark; characteristic |
| एहू | यही | this very thing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.104
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 118
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 118, 119
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