बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रेम बिबस मुख आव न बानी। दसा देखि हरषे मुनि ग्यानी।।
मूल पाठ
प्रेम बिबस मुख आव न बानी। दसा देखि हरषे मुनि ग्यानी।।
अहो धन्य तव जन्मु मुनीसा। तुम्हहि प्रान सम प्रिय गौरीसा।।
स्रोत अभिलेख 1.104 · पुस्तक पृ. 118, 119
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे प्रेममें मुग्ध हो गये, मुखसे वाणी नहीं निकलती। उनकी यह दशा देखकर ज्ञानी मुनि याज्ञवल्क्य बहुत प्रसन्न हुए [और बोले—] हे मुनीश! अहा हा! तुम्हारा जन्म धन्य है; तुमको गौरीपति शिवजी प्राणोंके समान प्रिय हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 118 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रेम बिबस मुख आव न बानी। दसा देखि हरषे मुनि ग्यानी।।
English explanation
Overwhelmed by love, he could not speak. Seeing his condition, the wise sage rejoiced.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रेम | प्रेम से | by love |
| बिबस | अभिभूत; विवश | overwhelmed |
| मुख | मुख से | from his mouth |
| आव | आती थी | came forth |
| न | नहीं | not |
| बानी | वाणी | speech |
| दसा | दशा | condition |
| देखि | देखकर | seeing |
| हरषे | प्रसन्न हुए | rejoiced |
| मुनि | मुनि याज्ञवल्क्य | sage Yajnavalkya |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise |
2 अहो धन्य तव जन्मु मुनीसा। तुम्हहि प्रान सम प्रिय गौरीसा।।
English explanation
Ah, foremost of sages, blessed is your birth! Shiva, Gauri’s lord, is as dear to you as your own life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अहो | अहो! | Ah! |
| धन्य | धन्य; सार्थक | blessed |
| तव | तुम्हारा | your |
| जन्मु | जन्म | birth |
| मुनीसा | हे मुनिश्रेष्ठ | O foremost of sages |
| तुम्हहि | तुम्हें | to you |
| प्रान | प्राण | one’s life |
| सम | के समान | as dear as |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| गौरीसा | गौरी के स्वामी शिव | Shiva, Gauri’s lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.104
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 118
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 118, 119
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