बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संभु चरित सुनि सरस सुहावा। भरद्वाज मुनि अति सुख पावा।।
मूल पाठ
संभु चरित सुनि सरस सुहावा। भरद्वाज मुनि अति सुख पावा।।
बहु लालसा कथा पर बाढ़ी। नयनन्हि नीरु रोमावलि ठाढ़ी।।
स्रोत अभिलेख 1.104 · पुस्तक पृ. 118, 119
भावार्थ
मूल पाठ के बादशिवजीके रसीले और सुहावने चरित्रको सुनकर मुनि भरद्वाजजीने बहुत ही सुख पाया। कथा सुननेकी उनकी लालसा बहुत बढ़ गयी। नेत्रोंमें जल भर आया तथा रोमावली खड़ी हो गयी॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 118 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 संभु चरित सुनि सरस सुहावा। भरद्वाज मुनि अति सुख पावा।।
English explanation
Hearing Shiva’s delightful, beautiful story, sage Bharadvaja felt immense joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संभु | शिव | Shiva |
| चरित | चरित्र; कथा | story; deeds |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सरस | रसपूर्ण | delightful |
| सुहावा | सुंदर और मनभावन | beautiful and pleasing |
| भरद्वाज | ऋषि भरद्वाज | Bharadvaja, the sage |
| मुनि | मुनि | sage |
| अति | अत्यंत | immense; very great |
| सुख | सुख | joy |
| पावा | पाया | experienced |
2 बहु लालसा कथा पर बाढ़ी। नयनन्हि नीरु रोमावलि ठाढ़ी।।
English explanation
His longing for the story greatly increased; tears filled his eyes and his hairs stood on end.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहु | बहुत | greatly |
| लालसा | उत्कट इच्छा | longing |
| कथा | कथा | the story |
| पर | के प्रति | for; toward |
| बाढ़ी | बढ़ गई | increased |
| नयनन्हि | आँखों में | in the eyes |
| नीरु | आँसू | tears |
| रोमावलि | शरीर के रोमों की पंक्ति | the body’s hairs |
| ठाढ़ी | खड़ी हो गई | stood on end |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.104
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 118
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 118, 119
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।