बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सिय सोभा नहिं जाइ बखानी। जगदंबिका रूप गुन खानी।।
मूल पाठ
सिय सोभा नहिं जाइ बखानी। जगदंबिका रूप गुन खानी।।
उपमा सकल मोहि लघु लागीं। प्राकृत नारि अंग अनुरागीं।।
स्रोत अभिलेख 1.247 · पुस्तक पृ. 240, 241
भावार्थ
मूल पाठ के बादरूप और गुणोंकी खान जगज्जननी जानकीजीकी शोभाका वर्णन नहीं हो सकता। उनके लिये मुझे [काव्यकी] सब उपमाएँ तुच्छ लगती हैं; क्योंकि वे लौकिक स्त्रियोंके अंगोंसे अनुराग रखनेवाली हैं (अर्थात् वे जगत्की स्त्रियोंके अंगोंको दी जाती हैं)। [काव्यकी उपमाएँ सब त्रिगुणात्मक, मायिक जगत्से ली गयी हैं, उन्हें भगवान्की स्वरूपाशक्ति श्रीजानकीजीके अप्राकृत, चिन्मय अंगोंके लिये प्रयुक्त करना उनका अपमान करना और अपनेको उपहासास्पद बनाना है]॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 240 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सिय सोभा नहिं जाइ बखानी। जगदंबिका रूप गुन खानी।।
English explanation
Sita’s beauty cannot be described. She is the Mother of the universe, a treasury of beauty and virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिय | सीता की | Sita’s |
| सोभा | शोभा; सौंदर्य | beauty; splendor |
| नहिं | नहीं | not |
| जाइ | जा सकती | can be |
| बखानी | वर्णित की | described |
| जगदंबिका | जगत की माता | Mother of the universe |
| रूप | सौंदर्य | beauty |
| गुन | गुणों की | of virtues |
| खानी | खान; भंडार | mine; treasury |
2 उपमा सकल मोहि लघु लागीं। प्राकृत नारि अंग अनुरागीं।।
English explanation
All comparisons seemed inadequate to me, being attached to the bodily beauty of ordinary women.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उपमा | सौंदर्य की तुलनाएँ | comparisons of beauty |
| सकल | सभी | all |
| मोहि | मुझे | to me |
| लघु | तुच्छ; अपर्याप्त | slight; inadequate |
| लागीं | लगीं | seemed |
| प्राकृत | साधारण; लौकिक | ordinary; worldly |
| नारि | स्त्रियों के | of women |
| अंग | अंगों से | to bodily features |
| अनुरागीं | अनुरक्त; जुड़ी हुई | attached; devoted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.247
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 240
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 240, 241
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