बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सिय निंदक अघ ओघ नसाए। लोक बिसोक बनाइ बसाए।।
मूल पाठ
सिय निंदक अघ ओघ नसाए। लोक बिसोक बनाइ बसाए।।
बंदउँ कौसल्या दिसि प्राची। कीरति जासु सकल जग माची।।
स्रोत अभिलेख 1.16 · पुस्तक पृ. 38, 39
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्होंने [अपनी पुरीमें रहनेवाले] सीताजीकी निन्दा करनेवाले (धोबी और उसके समर्थक पुर-नर-नारियों) के पापसमूहको नाश कर उनको शोकरहित बनाकर अपने लोक (धाम) में बसा दिया। मैं कौसल्यारूपी पूर्व दिशाकी वन्दना करता हूँ, जिसकी कीॢत समस्त संसारमें फैल रही है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 38 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सिय निंदक अघ ओघ नसाए। लोक बिसोक बनाइ बसाए।।
English explanation
The Lord destroyed the accumulated sins of Sita’s detractors and, making them free from sorrow, settled them in his realm.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिय | सीता के | of Sita |
| निंदक | निंदा करने वालों के | of the detractors |
| अघ | पापों के | of sins |
| ओघ | समूह | multitudes |
| नसाए | नष्ट किए | destroyed |
| लोक | अपने लोक में | in his realm |
| बिसोक | शोक से रहित | free from sorrow |
| बनाइ | बनाकर | having made |
| बसाए | बसाया | settled them |
2 बंदउँ कौसल्या दिसि प्राची। कीरति जासु सकल जग माची।।
English explanation
I bow to Kausalya, likened to the eastern direction, whose fame has spread throughout the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदउँ | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow to |
| कौसल्या | राम की माता कौसल्या | Kausalya, Rama’s mother |
| दिसि | दिशा | direction |
| प्राची | पूर्व की | eastern |
| कीरति | कीर्ति | fame |
| जासु | जिनकी | whose |
| सकल | समस्त | the entire |
| जग | जगत में | in the world |
| माची | फैल गई | has spread |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 38
- सहायक विषय
- श्रीसीताराम-धाम-परिकर-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 38, 39
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।