बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बंदउँ अवध पुरी अति पावनि। सरजू सरि कलि कलुष नसावनि।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमैं अति पवित्र श्रीअयोध्यापुरी और कलियुगके पापोंका नाश करनेवाली श्रीसरयू नदीकी वन्दना करता हूँ। फिर अवधपुरीके उन नर-नारियोंको प्रणाम करता हूँ जिनपर प्रभु श्रीरामचन्द्रजीकी ममता थोड़ी नहीं है (अर्थात् बहुत है)॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 38 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बंदउँ अवध पुरी अति पावनि। सरजू सरि कलि कलुष नसावनि।।
प्रनवउँ पुर नर नारि बहोरी। ममता जिन्ह पर प्रभुहि न थोरी।।
स्रोत अभिलेख 1.16 · पुस्तक पृ. 38, 39
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बंदउँ अवध पुरी अति पावनि। सरजू सरि कलि कलुष नसावनि।।
English explanation
I bow to the most holy city of Ayodhya and to the Sarayu River, which destroys the sins of the Kali age.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदउँ | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow to |
| अवध | अयोध्या | Ayodhya |
| पुरी | नगरी | city |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| पावनि | पवित्र | holy |
| सरजू | सरयू | the Sarayu |
| सरि | नदी | river |
| कलि | कलियुग के | of the Kali age |
| कलुष | पाप और मलिनता | sin and impurity |
| नसावनि | नष्ट करने वाली | destroying |
2 प्रनवउँ पुर नर नारि बहोरी। ममता जिन्ह पर प्रभुहि न थोरी।।
English explanation
Next I bow to the men and women of that city, for whom the Lord has no little affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रनवउँ | मैं प्रणाम करता हूँ | I offer homage to |
| पुर | नगरी के | of the city |
| नर | पुरुषों | the men |
| नारि | स्त्रियों | the women |
| बहोरी | फिर | next |
| ममता | स्नेह | affection |
| जिन्ह | जिन लोगों के | whom |
| पर | प्रति | toward |
| प्रभुहि | प्रभु को | the Lord has |
| न | नहीं | not |
| थोरी | थोड़ा | little |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 38
- सहायक विषय
- श्रीसीताराम-धाम-परिकर-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 38, 39
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।