बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सिंघासनु अति दिब्य सुहावा। जाइ न बरनि बिरंचि बनावा।।
मूल पाठ
सिंघासनु अति दिब्य सुहावा। जाइ न बरनि बिरंचि बनावा।।
बैठे सिव बिप्रन्ह सिरु नाई। हृदयँ सुमिरि निज प्रभु रघुराई।।
स्रोत अभिलेख 1.1 · पुस्तक पृ. 114, 114
भावार्थ
मूल पाठ के बादवेदिकापर एक अत्यन्त सुन्दर दिव्य सिंहासन था, जिस [की सुन्दरता] का वर्णन नहीं किया जा सकता; क्योंकि वह स्वयं ब्रह्माजीका बनाया हुआ था। ब्राह्मणोंको सिर नवाकर और हृदयमें अपने स्वामी श्रीरघुनाथजीका स्मरण करके शिवजी उस सिंहासनपर बैठ गये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 114 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सिंघासनु अति दिब्य सुहावा। जाइ न बरनि बिरंचि बनावा।।
English explanation
The throne made by Brahma was exceedingly splendid and beautiful, beyond description.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिंघासनु | सिंहासन | throne |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| दिब्य | दिव्य | splendid and divine |
| सुहावा | मनोहर | beautiful |
| जाइ | किया जा सकता | can be done |
| न | नहीं | not |
| बरनि | वर्णन | described |
| बिरंचि | ब्रह्मा ने | by Brahma, the creator |
| बनावा | बनाया | made |
2 बैठे सिव बिप्रन्ह सिरु नाई। हृदयँ सुमिरि निज प्रभु रघुराई।।
English explanation
Shiva sat down after bowing his head to the Brahmins and remembering his lord Rama in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैठे | बैठ गए | sat down |
| सिव | भगवान शिव | Shiva |
| बिप्रन्ह | ब्राह्मणों को | to the Brahmins |
| सिरु | सिर | head |
| नाई | झुकाकर | having bowed |
| हृदयँ | हृदय में | in his heart |
| सुमिरि | स्मरण करके | having remembered |
| निज | अपने | his own |
| प्रभु | स्वामी का | lord |
| रघुराई | श्रीराम, रघुवंश के स्वामी | Rama, lord of the Raghu lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 114
- सहायक विषय
- शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 114, 114
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