बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सासु ससुर गुर सेवा करेहू। पति रुख लखि आयसु अनुसरेहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसास, ससुर और गुरुकी सेवा करना। पतिका रुख देखकर उनकी आज्ञाका पालन करना। सयानी सखियाँ अत्यन्त स्नेहके वश कोमल वाणीसे स्त्रियोंके धर्म सिखलाती हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 318 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सासु ससुर गुर सेवा करेहू। पति रुख लखि आयसु अनुसरेहू।।
अति सनेह बस सखीं सयानी। नारि धरम सिखवहिं मृदु बानी।।
स्रोत अभिलेख 1.334 · पुस्तक पृ. 318, 319
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सासु ससुर गुर सेवा करेहू। पति रुख लखि आयसु अनुसरेहू।।
English explanation
Serve your mother-in-law, father-in-law, and teacher; discern your husband's wishes and follow his instructions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सासु | सास की | mother-in-law |
| ससुर | ससुर की | father-in-law |
| गुर | गुरु की | teacher or preceptor |
| सेवा | सेवा | service |
| करेहू | तुम करना | you should perform |
| पति | पति का | your husband's |
| रुख | रुख या इच्छा | inclination or wishes |
| लखि | समझकर | having discerned |
| आयसु | आज्ञा | instructions |
| अनुसरेहू | तुम पालन करना | you should follow |
2 अति सनेह बस सखीं सयानी। नारि धरम सिखवहिं मृदु बानी।।
English explanation
Moved by deep affection, the wise companions gently teach her a woman's duties.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यधिक | deep |
| सनेह | स्नेह के | affection |
| बस | वश में | moved by |
| सखीं | सखियाँ | female companions |
| सयानी | समझदार | wise |
| नारि | स्त्री के | a woman's |
| धरम | कर्तव्य | duties |
| सिखवहिं | सिखाती हैं | teach |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी में | in speech |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.334
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 318
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 318, 319
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।