बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि पुनि सीय गोद करि लेहीं। देइ असीस सिखावनु देहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवे बार-बार सीताजीको गोद कर लेती हैं और आशीर्वाद देकर सिखावन देती हैं—तुम सदा अपने पतिकी प्यारी होओ, तुम्हारा सोहाग अचल हो; हमारी यही आशिष है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 318 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पुनि पुनि सीय गोद करि लेहीं। देइ असीस सिखावनु देहीं।।
होएहु संतत पियहि पिआरी। चिरु अहिबात असीस हमारी।।
स्रोत अभिलेख 1.334 · पुस्तक पृ. 318, 319
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पुनि पुनि सीय गोद करि लेहीं। देइ असीस सिखावनु देहीं।।
English explanation
Again and again they take Sita into their laps, blessing her and giving her counsel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| सीय | सीता को | Sita |
| गोद | गोद में | into their laps |
| करि | करके | placing |
| लेहीं | लेती हैं | they take |
| देइ | देकर | giving |
| असीस | आशीर्वाद | blessings |
| सिखावनु | सीख | counsel |
| देहीं | देती हैं | they give |
2 होएहु संतत पियहि पिआरी। चिरु अहिबात असीस हमारी।।
English explanation
May you always be dear to your husband; may your married good fortune endure long—this is our blessing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होएहु | तुम रहो | may you be |
| संतत | सदा | always |
| पियहि | पति को | to your husband |
| पिआरी | प्रिय | dear |
| चिरु | दीर्घकाल तक | for a long time |
| अहिबात | सुहाग | good fortune as a married woman |
| असीस | आशीर्वाद | blessing |
| हमारी | हमारा | our |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.334
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 318
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 318, 319
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।