बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सादर सिवहि नाइ अब माथा। बरनउँ बिसद राम गुन गाथा।।
मूल पाठ
सादर सिवहि नाइ अब माथा। बरनउँ बिसद राम गुन गाथा।।
संबत सोरह सै एकतीसा। करउँ कथा हरि पद धरि सीसा।।
स्रोत अभिलेख 1.34 · पुस्तक पृ. 56, 57
भावार्थ
मूल पाठ के बादअब मैं आदरपूर्वक श्रीशिवजीको सिर नवाकर श्रीरामचन्द्रजीके गुणोंकी निर्मल कथा कहता हूँ। श्रीहरिके चरणोंपर सिर रखकर संवत् १६३१ में इस कथाका आरम्भ करता हूँ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 56 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सादर सिवहि नाइ अब माथा। बरनउँ बिसद राम गुन गाथा।।
English explanation
Now, reverently bowing my head to Shiva, I recount the pure tale of Rama’s virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदरपूर्वक | reverently |
| सिवहि | शिव को | to Shiva |
| नाइ | नवाकर | having bowed |
| अब | अब | now |
| माथा | सिर | my head |
| बरनउँ | मैं वर्णन करता हूँ | I recount |
| बिसद | निर्मल | pure |
| राम | श्रीराम के | of Rama |
| गुन | गुणों की | of the virtues |
| गाथा | गाथा | tale |
2 संबत सोरह सै एकतीसा। करउँ कथा हरि पद धरि सीसा।।
English explanation
In Vikrama Samvat 1631, placing my head at Hari’s feet, I compose this story.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संबत | विक्रम संवत् में | in the Vikrama era |
| सोरह | सोलह | sixteen |
| सै | सौ | hundred |
| एकतीसा | इकतीस | thirty-one |
| करउँ | मैं रचता हूँ | I compose |
| कथा | कथा | the story |
| हरि | हरि के | of Hari, the Lord |
| पद | चरणों पर | at the feet |
| धरि | रखकर | having placed |
| सीसा | सिर | my head |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.34
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 56
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 56, 57
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