बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि सब संसय करि दूरी। सिर धरि गुर पद पंकज धूरी।।
मूल पाठ
एहि बिधि सब संसय करि दूरी। सिर धरि गुर पद पंकज धूरी।।
पुनि सबही बिनवउँ कर जोरी। करत कथा जेहिं लाग न खोरी।।
स्रोत अभिलेख 1.34 · पुस्तक पृ. 56, 57
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस प्रकार सब संदेहोंको दूर करके और श्रीगुरुजीके चरणकमलोंकी रजको सिरपर धारण करके मैं पुन: हाथ जोड़कर सबकी विनती करता हूँ, जिससे कथाकी रचनामें कोई दोष स्पर्श न करने पावे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 56 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 एहि बिधि सब संसय करि दूरी। सिर धरि गुर पद पंकज धूरी।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: Having thus removed all doubts and placed the dust of the guru’s lotus feet upon my head—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | manner |
| सब | सभी | all |
| संसय | संशय | doubts |
| करि | करके | having made |
| दूरी | दूर | removed |
| सिर | सिर पर | upon my head |
| धरि | रखकर | having placed |
| गुर | गुरु के | of the guru |
| पद | चरण | feet |
| पंकज | कमल | lotuses |
| धूरी | धूल | dust |
2 पुनि सबही बिनवउँ कर जोरी। करत कथा जेहिं लाग न खोरी।।
English explanation
Then, with folded hands, I appeal to everyone, so that no blame may attach to me in telling the story.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| सबही | सब से | to everyone |
| बिनवउँ | मैं विनती करता हूँ | I appeal |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | having joined |
| करत | कहते समय | while telling |
| कथा | कथा | the story |
| जेहिं | जिससे | so that |
| लाग | लगे | may attach |
| न | नहीं | not |
| खोरी | दोष | blame |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.34
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 56
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 56, 57
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।