बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सादर सबके पाय पखारे। जथाजोगु पीढ़न्ह बैठारे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआदरके साथ सबके चरण धोये और सबको यथायोग्य पीढ़ोंपर बैठाया। तब जनकजीने अवधपति दशरथजीके चरण धोये। उनका शील और स्नेह वर्णन नहीं किया जा सकता॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 314 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सादर सबके पाय पखारे। जथाजोगु पीढ़न्ह बैठारे।।
धोए जनक अवधपति चरना। सीलु सनेहु जाइ नहिं बरना।।
स्रोत अभिलेख 1.328 · पुस्तक पृ. 313, 314
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सादर सबके पाय पखारे। जथाजोगु पीढ़न्ह बैठारे।।
English explanation
Everyone’s feet were respectfully washed, and they were seated on low stools as appropriate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| सबके | सभी के | everyone’s |
| पाय | पैर | feet |
| पखारे | धोए | washed |
| जथाजोगु | जिसके जैसा योग्य था | as appropriate for each |
| पीढ़न्ह | पीढ़ों पर | on low stools |
| बैठारे | बैठाया | seated them |
2 धोए जनक अवधपति चरना। सीलु सनेहु जाइ नहिं बरना।।
English explanation
Janaka washed the feet of Dasharatha, lord of Ayodhya. His graciousness and affection cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धोए | धोए | washed |
| जनक | राजा जनक ने | King Janaka |
| अवधपति | अयोध्या के राजा दशरथ के | of Dasharatha, lord of Ayodhya |
| चरना | चरण | feet |
| सीलु | विनम्र और शिष्ट स्वभाव | gracious character |
| सनेहु | स्नेह | affection |
| जाइ | किया जा सकता | can be done |
| नहिं | नहीं | not |
| बरना | वर्णन | description |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.328
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 314
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 313, 314
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।