बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि जेवनार भई बहु भाँती। पठए जनक बोलाइ बराती।।
मूल पाठ
पुनि जेवनार भई बहु भाँती। पठए जनक बोलाइ बराती।।
परत पाँवड़े बसन अनूपा। सुतन्ह समेत गवन कियो भूपा।।
स्रोत अभिलेख 1.328 · पुस्तक पृ. 313, 314
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर बहुत प्रकारकी रसोई बनी। जनकजीने बरातियोंको बुला भेजा। राजा दशरथजीने पुत्रोंसहित गमन किया। अनुपम वस्त्रोंके पाँवड़े पड़ते जाते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 313 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पुनि जेवनार भई बहु भाँती। पठए जनक बोलाइ बराती।।
English explanation
Then a feast of many kinds was prepared. Janaka sent people to invite the wedding guests.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| जेवनार | विवाह का भोज | wedding feast |
| भई | तैयार हुई | was prepared |
| बहु | अनेक | many |
| भाँती | प्रकारों की | of kinds |
| पठए | भेजे | sent |
| जनक | मिथिला के राजा जनक ने | Janaka, king of Mithila |
| बोलाइ | बुलाने के लिए | to invite |
| बराती | बरात के अतिथियों को | the wedding-party guests |
2 परत पाँवड़े बसन अनूपा। सुतन्ह समेत गवन कियो भूपा।।
English explanation
Beautiful cloths were being laid along the path. King Dasharatha proceeded to the feast with his sons.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परत | बिछाए जा रहे थे | were being laid |
| पाँवड़े | पैर रखने के लिए बिछे कपड़े | cloths spread for walking upon |
| बसन | वस्त्र | cloths |
| अनूपा | अनुपम | incomparably beautiful |
| सुतन्ह | पुत्रों के | his sons |
| समेत | साथ | with |
| गवन | प्रस्थान | departure |
| कियो | किया | made |
| भूपा | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.328
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 313
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 313, 314
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।