बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सादर चरन सरोज पखारे। अति पुनीत आसन बैठारे।।
मूल पाठ
सादर चरन सरोज पखारे। अति पुनीत आसन बैठारे।।
करि पूजा मुनि सुजस बखानी। बोले अति पुनीत मृदु बानी।।
स्रोत अभिलेख 1.45 · पुस्तक पृ. 67, 68
भावार्थ
मूल पाठ के बादआदरपूर्वक उनके चरणकमल धोये और बड़े ही पवित्र आसनपर उन्हें बैठाया। पूजा करके मुनि याज्ञवल्क्यजीके सुयशका वर्णन किया और फिर अत्यन्त पवित्र और कोमल वाणीसे बोले—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 67 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1सादर चरन सरोज पखारे। अति पुनीत आसन बैठारे।।
English explanation
Bharadvaja respectfully washed his lotus-like feet and seated him on a very sacred seat.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| चरन | चरण | feet |
| सरोज | कमल जैसे | lotus-like |
| पखारे | धोए | washed |
| अति | अत्यंत | very |
| पुनीत | पवित्र | sacred |
| आसन | आसन पर | on a seat |
| बैठारे | बैठाया | seated him |
2करि पूजा मुनि सुजस बखानी। बोले अति पुनीत मृदु बानी।।
English explanation
After offering worship and praising the sage's noble renown, Bharadvaja spoke in very pure and gentle words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having performed |
| पूजा | पूजा | worship |
| मुनि | मुनि के | the sage's |
| सुजस | उत्तम यश | noble renown |
| बखानी | बखान करके | having praised |
| बोले | बोले | he spoke |
| अति | अत्यंत | very |
| पुनीत | पवित्र | pure |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी में | in words |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.45
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 67
- सहायक विषय
- याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 67, 68
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।