बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एक बार भरि मकर नहाए। सब मुनीस आश्रमन्ह सिधाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दएक बार पूरे मकरभर स्नान करके सब मुनीश्वर अपने-अपने आश्रमोंको लौट गये। परम ज्ञानी याज्ञवल्क्य मुनिको चरण पकड़कर भरद्वाजजीने रख लिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 67 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
एक बार भरि मकर नहाए। सब मुनीस आश्रमन्ह सिधाए।।
जगबालिक मुनि परम बिबेकी। भरव्दाज राखे पद टेकी।।
स्रोत अभिलेख 1.45 · पुस्तक पृ. 67, 68
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1एक बार भरि मकर नहाए। सब मुनीस आश्रमन्ह सिधाए।।
English explanation
On one occasion, after bathing throughout the Makara bathing period, all the eminent sages left for their hermitages.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक | one |
| बार | अवसर पर | occasion |
| भरि | पूरे समय | throughout |
| मकर | मकर-स्नान काल में | the Makara bathing period |
| नहाए | स्नान किया | bathed |
| सब | सभी | all |
| मुनीस | श्रेष्ठ मुनि | eminent sages |
| आश्रमन्ह | आश्रमों को | to their hermitages |
| सिधाए | चले गए | departed |
2जगबालिक मुनि परम बिबेकी। भरव्दाज राखे पद टेकी।।
English explanation
Bharadvaja held the feet of the deeply discerning sage Yajnavalkya and persuaded him to stay.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जगबालिक | याज्ञवल्क्य ऋषि | Yajnavalkya, the sage |
| मुनि | मुनि | sage |
| परम | अत्यंत | supremely |
| बिबेकी | विवेकशील | discerning |
| भरव्दाज | भरद्वाज ऋषि ने | Bharadvaja, the sage |
| राखे | रोक लिया | kept him from leaving |
| पद | चरण | feet |
| टेकी | पकड़कर | holding |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.45
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 67
- सहायक विषय
- याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 67, 68
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।