बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाथ एक संसउ बड़ मोरें। करगत बेदतत्व सबु तोरें।।
मूल पाठ
नाथ एक संसउ बड़ मोरें। करगत बेदतत्व सबु तोरें।।
कहत सो मोहि लागत भय लाजा। जौ न कहउँ बड़ होइ अकाजा।।
स्रोत अभिलेख 1.45 · पुस्तक पृ. 67, 68
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे नाथ! मेरे मनमें एक बड़ा सन्देह है; वेदोंका तत्त्व सब आपकी मु_ीमें है (अर्थात् आप ही वेदका तत्त्व जाननेवाले होनेके कारण मेरा सन्देह निवारण कर सकते हैं) पर उस सन्देहको कहते मुझे भय और लाज आती है [भय इसलिये कि कहीं आप यह न समझें कि मेरी परीक्षा ले रहा है, लाज इसलिये कि इतनी आयु बीत गयी, अबतक ज्ञान न हुआ] और यदि नहीं कहता तो बड़ी हानि होती है [क्योंकि अज्ञानी बना रहता हूँ]॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 67 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1नाथ एक संसउ बड़ मोरें। करगत बेदतत्व सबु तोरें।।
English explanation
Master, I have a great doubt; the entire essential truth of the Vedas is within your grasp.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | O master |
| एक | एक | one |
| संसउ | संदेह | doubt |
| बड़ | बड़ा | great |
| मोरें | मेरे मन में | in my mind |
| करगत | पूर्णतः ज्ञात | within your grasp |
| बेदतत्व | वेदों का तत्त्व | the essential truth of the Vedas |
| सबु | समस्त | all |
| तोरें | आपके | your |
2 कहत सो मोहि लागत भय लाजा। जौ न कहउँ बड़ होइ अकाजा।।
English explanation
I feel fear and embarrassment in expressing that doubt; but if I do not speak, great harm will result.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते हुए | in expressing |
| सो | उस संदेह को | that doubt |
| मोहि | मुझे | to me |
| लागत | अनुभव होता है | is felt |
| भय | भय | fear |
| लाजा | लज्जा या संकोच | embarrassment |
| जौ | यदि | if |
| न | नहीं | not |
| कहउँ | मैं कहूँ | I speak |
| बड़ | बड़ी | great |
| होइ | होगी | will result |
| अकाजा | हानि | harm |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.45
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 67
- सहायक विषय
- याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 67, 68
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।