बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
साचेहुँ उन्ह के मोह न माया। उदासीन धनु धामु न जाया।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसचमुच उनके न किसीका मोह है, न माया, न उनके धन है, न घर है और न स्त्री ही है; वे सबसे उदासीन हैं। इसीसे वे दूसरेका घर उजाडऩेवाले हैं। उन्हें न किसीकी लाज है, न डर है। भला, बाँझ स्त्री प्रसवकी पीड़ाको क्या जाने॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 111 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
साचेहुँ उन्ह के मोह न माया। उदासीन धनु धामु न जाया।।
पर घर घालक लाज न भीरा। बाझँ कि जान प्रसव कैं पीरा।।
स्रोत अभिलेख 1.97 · पुस्तक पृ. 111, 111
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 साचेहुँ उन्ह के मोह न माया। उदासीन धनु धामु न जाया।।
English explanation
Indeed, Narada has neither attachment nor worldly possessiveness; he is detached, with no wealth, home, or wife.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| साचेहुँ | सचमुच ही | indeed |
| उन्ह | उनके; नारद के | his; Narada's |
| के | को/में; संबंधसूचक | marks possession or attribution |
| मोह | मोह, आसक्ति | attachment |
| न | नहीं | no |
| माया | माया-ममता | worldly possessiveness |
| उदासीन | विरक्त | detached |
| धनु | धन | wealth |
| धामु | घर | home |
| न | नहीं | no |
| जाया | पत्नी | wife |
2 पर घर घालक लाज न भीरा। बाझँ कि जान प्रसव कैं पीरा।।
English explanation
One who ruins others' households feels neither shame nor fear. How could a barren woman know the pain of childbirth?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पर | दूसरों का | others' |
| घर | घर | household |
| घालक | नष्ट करने वाला | one who destroys |
| लाज | लज्जा | shame |
| न | नहीं | neither |
| भीरा | भय | fear |
| बाझँ | बाँझ स्त्री | a barren woman |
| कि | क्या; प्रश्नसूचक | can; rhetorical question marker |
| जान | जानती है | knows |
| प्रसव | प्रसव | childbirth |
| कैं | की | of |
| पीरा | पीड़ा | pain |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.97
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 111
- सहायक विषय
- शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 111, 111
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।