बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जननिहि बिकल बिलोकि भवानी। बोली जुत बिबेक मृदु बानी।।
मूल पाठ
जननिहि बिकल बिलोकि भवानी। बोली जुत बिबेक मृदु बानी।।
अस बिचारि सोचहि मति माता। सो न टरइ जो रचइ बिधाता।।
स्रोत अभिलेख 1.97 · पुस्तक पृ. 111, 111
भावार्थ
मूल पाठ के बादमाताको विकल देखकर पार्वतीजी विवेकयुक्त कोमल वाणी बोलीं—हे माता! जो विधाता रच देते हैं, वह टलता नहीं; ऐसा विचारकर तुम सोच मत करो!॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 111 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जननिहि बिकल बिलोकि भवानी। बोली जुत बिबेक मृदु बानी।।
English explanation
Seeing her mother distraught, Bhavani spoke gently and with discernment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जननिहि | माता को | her mother |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| भवानी | भवानी; पार्वती | Bhavani, Parvati |
| बोली | बोलीं | spoke |
| जुत | युक्त | endowed with |
| बिबेक | विवेक | discernment |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी | speech |
2 अस बिचारि सोचहि मति माता। सो न टरइ जो रचइ बिधाता।।
English explanation
Mother, do not grieve by thinking this way. What the Creator ordains cannot be averted.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| बिचारि | विचार करके | having thought |
| सोचहि | शोक करो | grieve |
| मति | मत | do not |
| माता | हे माता | O mother |
| सो | वह | that |
| न | नहीं | not |
| टरइ | टलता है | is averted |
| जो | जो | what |
| रचइ | रचते हैं; निर्धारित करते हैं | ordains |
| बिधाता | विधाता; सृष्टिकर्ता | the Creator |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.97
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 111
- सहायक विषय
- शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 111, 111
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।