बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करम लिखा जौ बाउर नाहू। तौ कत दोसु लगाइअ काहू।।
मूल पाठ
करम लिखा जौ बाउर नाहू। तौ कत दोसु लगाइअ काहू।।
तुम्ह सन मिटहिं कि बिधि के अंका। मातु ब्यर्थ जनि लेहु कलंका।।
स्रोत अभिलेख 1.97 · पुस्तक पृ. 111, 111
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो मेरे भाग्यमें बावला ही पति लिखा है तो किसीको क्यों दोष लगाया जाय? हे माता! क्या विधाताके अङ्क तुमसे मिट सकते हैं? वृथा कलङ्कका टीका मत लो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 111 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 करम लिखा जौ बाउर नाहू। तौ कत दोसु लगाइअ काहू।।
English explanation
If a mad husband is written in my destiny, why should anyone be blamed?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करम | भाग्य में | in destiny |
| लिखा | लिखा है | is written |
| जौ | यदि | if |
| बाउर | बावला | mad |
| नाहू | पति | husband |
| तौ | तो | then |
| कत | क्यों | why |
| दोसु | दोष | blame |
| लगाइअ | लगाया जाए | should be assigned |
| काहू | किसी को | to anyone |
2 तुम्ह सन मिटहिं कि बिधि के अंका। मातु ब्यर्थ जनि लेहु कलंका।।
English explanation
Can the marks of destiny written by the Creator be erased through your efforts? Mother, do not take needless blame upon yourself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | तुम्हारे | your |
| सन | से; तुम्हारे प्रयास से | by; through your efforts |
| मिटहिं | मिट सकते हैं | can be erased |
| कि | क्या | question marker |
| बिधि | विधाता | the Creator |
| के | के | of |
| अंका | लिखे हुए भाग्य-लेख | inscribed marks of destiny |
| मातु | हे माता | O mother |
| ब्यर्थ | व्यर्थ | needlessly |
| जनि | मत | do not |
| लेहु | लो; अपने ऊपर लो | take upon yourself |
| कलंका | कलंक | blame or disgrace |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.97
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 111
- सहायक विषय
- शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 111, 111
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।