बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सहित बसिष्ठ सोह नृप कैसें। सुर गुर संग पुरंदर जैसें।।
मूल पाठ
सहित बसिष्ठ सोह नृप कैसें। सुर गुर संग पुरंदर जैसें।।
करि कुल रीति बेद बिधि राऊ। देखि सबहि सब भाँति बनाऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.302 · पुस्तक पृ. 285, 285
भावार्थ
मूल पाठ के बादवसिष्ठजीके साथ [जाते हुए] राजा दशरथजी कैसे शोभित हो रहे हैं, जैसे देवगुरु बृहस्पतिजीके साथ इन्द्र हों। वेदकी विधिसे और कुलकी रीतिके अनुसार सब कार्य करके तथा सबको सब प्रकारसे सजे देखकर,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 285 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सहित बसिष्ठ सोह नृप कैसें। सुर गुर संग पुरंदर जैसें।।
English explanation
AI draft interpretation: The king looks splendid beside Vashishtha, like Indra beside Brihaspati, the gods’ preceptor.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहित | के साथ | together with |
| बसिष्ठ | राजगुरु वसिष्ठ | Vashishtha, the royal preceptor |
| सोह | शोभित हैं | looks splendid |
| नृप | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| कैसें | कैसे; किस प्रकार | how; in what manner |
| सुर | देवताओं के | of the gods |
| गुर | गुरु बृहस्पति | preceptor Brihaspati |
| संग | के साथ | with |
| पुरंदर | देवराज इंद्र | Indra, king of the gods |
| जैसें | जैसे | just as |
2 करि कुल रीति बेद बिधि राऊ। देखि सबहि सब भाँति बनाऊ।।
English explanation
After observing the family customs and Vedic rites, the king inspected everyone and all the arrangements.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having performed |
| कुल | वंश की | of the family lineage |
| रीति | परंपरागत रीति | customary observances |
| बेद | वेदों की | of the Vedas |
| बिधि | निर्दिष्ट विधि | prescribed rites |
| राऊ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| देखि | देखकर; जाँचकर | having looked over; inspected |
| सबहि | सभी को | everyone |
| सब | सभी | all |
| भाँति | प्रकार की | kinds of |
| बनाऊ | तैयारी; व्यवस्था | preparations; arrangements |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.302
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 285
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 285, 285
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।