बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
समुझि राजसुख दुखित अराती। अवाँ अनल इव सुलगइ छाती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवह शत्रु अपने राज्य-सुखको समझ करके (स्मरण करके) दुखी था। उसकी छाती [कुम्हारके] आँवेकी आगकी तरह [भीतर-ही-भीतर] सुलग रही थी। राजाके सरल वचन कानसे सुनकर, अपने वैरको यादकर वह हृदयमें हॢषत हुआ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 165 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
समुझि राजसुख दुखित अराती। अवाँ अनल इव सुलगइ छाती।।
सरल बचन नृप के सुनि काना। बयर सँभारि हृदयँ हरषाना।।
स्रोत अभिलेख 1.16 · पुस्तक पृ. 164, 165
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 समुझि राजसुख दुखित अराती। अवाँ अनल इव सुलगइ छाती।।
English explanation
Remembering royal comforts, the enemy was distressed; his breast smoldered like the fire in a potter’s kiln.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समुझि | याद करके | remembering |
| राजसुख | राज्य के सुख | royal comforts |
| दुखित | दुखी | distressed |
| अराती | शत्रु | the enemy |
| अवाँ | कुम्हार का आँवा; भट्ठी | a potter’s kiln |
| अनल | आग | fire |
| इव | के समान | like |
| सुलगइ | सुलगती है | smolders |
| छाती | छाती | his breast |
2 सरल बचन नृप के सुनि काना। बयर सँभारि हृदयँ हरषाना।।
English explanation
Hearing the king’s innocent words, he recalled his enmity and rejoiced inwardly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सरल | सरल; निष्कपट | innocent; guileless |
| बचन | वचन | words |
| नृप | राजा | the king |
| के | के | of |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| काना | कानों से | with his ears |
| बयर | शत्रुता | enmity |
| सँभारि | याद करके | recalling |
| हृदयँ | हृदय में | in his heart |
| हरषाना | प्रसन्न हुआ | rejoiced |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 165
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 164, 165
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।